आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल युवाओं का माध्यम नहीं रह गया है। वरिष्ठ नागरिक भी तेजी से इस आभासी दुनिया में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। वे परिवार और मित्रों से जुड़े रहने, नए समुदायों से संवाद स्थापित करने तथा अपने शौक और रुचियों को पुनर्जीवित करने के लिए इन मंचों का उपयोग कर रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिकों की यह बढ़ती भागीदारी एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन का संकेत है।
कमलाकर सिंह
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल युवाओं का माध्यम नहीं रह गया है। वरिष्ठ नागरिक भी तेजी से इस आभासी दुनिया में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। वे परिवार और मित्रों से जुड़े रहने, नए समुदायों से संवाद स्थापित करने तथा अपने शौक और रुचियों को पुनर्जीवित करने के लिए इन मंचों का उपयोग कर रहे हैं। फोटो साझा करना, जीवन के अनुभव लिखना, धार्मिक या सामाजिक विचारों पर प्रतिक्रिया देना, समाचारों से अपडेट रहना इन सबके माध्यम से वे डिजिटल रूप से अधिक आत्मविश्वासी और अभिव्यक्तिशील बन रहे हैं। वरिष्ठ नागरिकों की यह बढ़ती भागीदारी एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। जिस पीढ़ी ने संवाद के पारंपरिक माध्यम आमने-सामने की बातचीत, पत्र लेखन और दूरभाष के साथ जीवन जिया, उसके लिए डिजिटल मंच आरंभ में अपरिचित प्रतीत होना स्वाभाविक है। किंतु फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म ने उन्हें प्रियजनों से पुन: जोड़ने का अवसर दिया है। यह माध्यम पीढ़ियों के बीच की दूरी को कम करता है, संवाद को सशक्त बनाता है और वरिष्ठों को अपने अनुभव, ज्ञान और संवेदनाएँ साझा करने का मंच प्रदान करता है।
परिवार और मित्रों से निरंतर जुड़ाव सोशल मीडिया का सबसे बड़ा लाभ है। दूर रहकर भी फोटो, वीडियो और तात्कालिक अपडेट के माध्यम से वरिष्ठ नागरिक अपने प्रियजनों के जीवन में सहभागी बने रहते हैं। ‘लाइक’ और ‘कमेंट’ जैसे छोटे-से डिजिटल संकेत भी भावनात्मक संतोष देते हैं। अकेले रह रहे वरिष्ठों के लिए यह संवाद एक मानसिक संबल का कार्य करता है और एकाकीपन को कम करने में सहायक सिद्ध होता है।
सोशल मीडिया केवल पुराने संबंधों को पुनर्जीवित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नए मित्रों और समान रुचि वाले लोगों से जुड़ने का अवसर भी देता है। बागवानी, साहित्य, स्वास्थ्य, अध्यात्म या यात्रा जैसे विषयों पर बने समूह वरिष्ठों को विचार-विनिमय का मंच प्रदान करते हैं। विशेष बात यह है कि वरिष्ठ नागरिक अपेक्षाकृत गंभीर और दीर्घ लेखन पढ़ना पसंद करते हैं, टिप्पणियों में शांतिपूर्वक चर्चा करते हैं और विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इस प्रकार वे डिजिटल संसार में एक संतुलित और चिंतनशील संस्कृति का निर्माण कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया सीखने, रचनात्मकता और मनोरंजन का सशक्त साधन भी बन गया है। अनेक वरिष्ठ अपने छोटे-छोटे आनलाइन व्यवसाय चला रहे हैं, कुछ कविता या संस्मरण साझा कर रहे हैं, तो कुछ अपनी तस्वीरों को पोस्ट करने में प्रसन्नता अनुभव करते हैं। इन सब से मिलने वाली प्रतिक्रियाएं उन्हें यह एहसास कराती हैं कि वे आज भी समाज से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
यद्यपि इसके अनेक लाभ हैं, फिर भी गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर वरिष्ठ नागरिकों की चिंताएं स्वाभाविक हैं। आॅनलाइन ठगी या व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग का भय उन्हें आशंकित करता है। इस संदर्भ में डिजिटल साक्षरता अत्यंत आवश्यक है, मजबूत पासवर्ड का उपयोग, दो स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर आथेंटिकेशन), निजी जानकारी साझा करने में सावधानी तथा अपरिचित व्यक्तियों से सतर्कता जैसे उपाय उन्हें सुरक्षित रख सकते हैं। जो वरिष्ठ नागरिक सोशल मीडिया पर नए हैं, उनके लिए क्रमिक और सरल शुरूआत उपयुक्त है। एक प्लेटफॉर्म जो विशेषकर फेसबुक से शुरुआत कर प्रोफाइल बनाना, परिचितों से जुड़ना और धीरे-धीरे रुचि-आधारित समूहों से संवाद स्थापित करना एक प्रभावी तरीका है। नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है और डिजिटल संसार सहज लगने लगता है।
परिवार और देखभाल करने वालों की भूमिका यहां अत्यंत महत्वपूर्ण है। धैर्यपूर्वक मार्गदर्शन, छोटे-छोटे प्रयासों की सराहना और उनके पोस्ट पर सकारात्मक प्रतिक्रिया उन्हें प्रेरित करती है। इस प्रकार सोशल मीडिया केवल तकनीकी उपयोग नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बन जाता है। आज के व्यस्त समय में, जब प्रत्यक्ष संवाद के अवसर सीमित होते जा रहे हैं, सोशल मीडिया वरिष्ठ नागरिकों के लिए निरंतरता, अपनत्व और सक्रियता का मंच बनकर उभरा है। उचित मार्गदर्शन और सुरक्षा के साथ यह माध्यम उनके जीवन में सकारात्मकता, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन को सुदृढ़ कर सकता है। अंतत:, जब मन सक्रिय और संवाद जीवित हो, तब उम्र केवल एक संख्या भर रह जाती है और डिजिटल संसार एक नई उड़ान का अवसर बन जाता है। किसी शायर ने कहा भी है...
उम्र का बढ़ना तो दस्तूर-ए-जहां है, महसूस न करें तो बढ़ती कहां है।
लेखक- पूर्व कुलपति, भोपाल


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही असाधारण यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों तक उन्होंने शासन की एक ऐसी शैली विकसित की, जिसमें विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखा गया।
मोदी जी की कूटनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है, जिसने पूर्व में जी-20 के मंच पर भी विश्व को चकित किया था। लगभग सात वर्ष बाद चीनी और रूस जैसे देशों को एक साथ एक मंच पर लाना निःसंदेह उनकी उसी भगीरथ भूमिका की पुष्टि करता है, जिसके बल पर वे उभरती बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था में भारत को केंद्रीय स्थान दिला चुके हैं।
विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 17 सितंबर 2026 विशेष। जानिए भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत, ग्रामीण इलाकों की चुनौतियां, नकली दवाओं का साम्राज्य और मरीज सुरक्षा से जुड़े कड़े सवाल।
1947 में 34 करोड़ से बढ़कर 2026 में 147 करोड़ पहुंची भारत की आबादी।
जानिए आजादी के बाद देश की दशा और दिशा बदलने वाले 10 सबसे बड़े कानूनी और संवैधानिक बदलावों की पूरी विस्तार से जानकारी।
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की 150वीं जयंती पर जानिए इसके संगीत का इतिहास। रविंद्रनाथ टैगोर से लेकर पंडित पलुस्कर और ए.आर. रहमान तक ने दी इसे धुन।
राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ पर पढ़ें इसकी रचना, बंकिम चंद्र चटर्जी का योगदान, स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास और इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
Friendship Day 2026 पर पढ़िए एक विशेष आलेख। जानिए दोस्ती का महत्व, इतिहास और डिजिटल युग में सच्ची मित्रता के मायने।
तकनीक और रिश्तों के बदलते समीकरण पर कमलाकर सिंह का विशेष लेख। क्या AI साथी वास्तविक संबंधों का विकल्प बन सकते हैं? मानवीय गरिमा और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा।
1 जुलाई को राष्ट्रीय डॉक्टर्स डे क्यों मनाया जाता है? डॉ. बिधान चंद्र रॉय के जीवन और डॉक्टरों के सम्मान में समर्पित इस विशेष दिन के इतिहास और महत्व को विस्तार से जानें।