गुरु और शिष्य का संबंध केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने वाला एक पवित्र मार्ग है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे मध्य प्रदेश में भक्ति, श्रद्धा और अटूट आस्था का ऐसा अनुपम संगम देखने को मिला, जिसने संपूर्ण वातावरण को दिव्य और भक्तिमय बना दिया।

उज्जैन में भगवान श्रीकृष्ण-सांदीपनि मुनि के पंचामृत अभिषेक
श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हजारों पुलिसकर्मी रहे तैनात

भोपाल। स्टार समाचार वेब
गुरु और शिष्य का संबंध केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा का परमात्मा से मिलन कराने वाला एक पवित्र मार्ग है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे मध्य प्रदेश में भक्ति, श्रद्धा और अटूट आस्था का ऐसा अनुपम संगम देखने को मिला, जिसने संपूर्ण वातावरण को दिव्य और भक्तिमय बना दिया। ब्रह्म मुहूर्त से ही ढोल-नगाड़ों की गूंज, वेदमंत्रों के उच्चारण और गुरुदेव के जयकारों से पूरा प्रदेश गुंजायमान हो उठा। प्रदेशभर के प्रमुख गुरुधामों, संत समाधियों, और पावन नदियों के घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इस बात का साक्ष्य दे रही थी कि मौसम की बंदिशें और रिमझिम बारिश भी भक्तों की अगाध आस्था के आगे छोटी पड़ गईं।

श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर, नर्मदापुरम, जबलपुर, ग्वालियर, सीहोर, मुलताई सहित राज्य के विभिन्न अंचलों में स्थिति पवित्र नदियों (नर्मदा, ताप्ती, चंबल, शिप्रा) के घाटों पर तड़के से ही श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। यद्यपि लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे, फिर भी भक्तों के भक्तिभाव और उत्साह में कोई कमी नजर नहीं आई।

उज्जैन: सांदीपनि आश्रम में अलौकिक दृश्य
भगवान श्री कृष्ण और उनके शिक्षा गुरु सांदीपनि मुनि की पावन तपोभूमि उज्जैन में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत दिव्यता के साथ मनाया गया। तड़के मंगलनाथ मार्ग स्थित प्राचीन सांदीपनि आश्रम के पट खुलते ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया।

ब्रह्म मुहूर्त में किया अभिषेक
ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र शिप्रा, गंगा और गोमती के जल से भगवान श्रीकृष्ण और गुरु सांदीपनि मुनि का अभिषेक किया गया। इसके उपरांत पंचामृत पूजन कर प्रभु को नवीन मनमोहक वस्त्र धारण कराए गए और महकते मोगरे के पुष्पों से अलौकिक श्रृंगार किया गया। विधि-विधान से पूजन और महाआरती के पश्चात विश्व शांति और कल्याण की कामना से महाहवन का आयोजन हुआ।
दादा दरबार में लाखों भक्तों ने टेका मत्था

खंडवा स्थित दादाजी धूनीवाले (श्री दादा दरबार) में गुरु पूर्णिमा पर आस्था का महासमुद्र उमड़ पड़ा। परम पूज्य बड़े दादाजी श्री केशवानंद महाराज और छोटे दादाजी श्री हरिहरानंद महाराज की समाधि के दर्शन के लिए तड़के से ही दो लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। जय दादाजी की के उद्घोष से पूरी नगरी गूंज उठी।
स्पेशल मेमू ट्रेन संचालित की गई
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे द्वारा खंडवा-सनावद के बीच स्पेशल मेमू ट्रेन संचालित की गई, ताकि दूर-दूर से आने वाले भक्तों की यात्रा सुगम हो सके। सुरक्षा और सेवा भाव का ऐसा नजारा था कि शहरभर में 500 से अधिक स्थानों पर भक्तों द्वारा स्वैच्छिक भंडारे लगाए गए, जहां पूरी-सब्जी, खिचड़ी, मिष्ठान से लेकर आइसक्रीम तक का प्रसाद श्रद्धालुओं को अत्यंत भाव से परोसा गया।
कुबेरेश्वर धाम में आध्यात्मिक वाणी की रसधार

सीहोर स्थित प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में हजारों की संख्या में भक्त अपने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने पहुंचे। पंडित प्रदीप मिश्रा के सान्निध्य में भक्तों ने गुरु वंदन, विशेष पूजा-अर्चना और आरती की। पंडित मिश्रा ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जीवन के अंधकार को मिटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरु ही ईश्वर का साक्षात स्वरूप हैं।
हरदा में भक्ति की पावन गंगा
हरदा के 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक पट्टाभिराम मंदिर में आठ दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तहत अलौकिक भक्तिमय माहौल देखने को मिला। बुधवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त में काकड़ा आरती के साथ दिवस की शुरुआत हुई। इसके बाद हल्की रिमझिम बारिश के बीच भक्तों की टोली ने प्रभातफेरी निकाली। मार्ग में पड़ने वाले सभी देवालयों में ध्वज पूजन किया गया और पूरे नगर में हरिनाम संकीर्तन की गूंज बनी रही।
मुरैना के मंदिरों में अनुष्ठान
मुरैना के करह धाम तथा प्रसिद्ध घरौंना सरकार हनुमान मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालुओं ने हनुमान जी महाराज और अपने-अपने गुरुओं के श्रीचरणों में नमन कर सुख-समृद्धि की कामना की।


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