भारतीय संस्कृति में सरस्वती केवल एक पौराणिक कल्पना नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की जीवनधारा रही हैं।

श्रीश देवपुजारी
भारतीय संस्कृति में सरस्वती केवल एक पौराणिक कल्पना नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की जीवनधारा रही हैं। 1960-70 के दशक तक विद्यालयों में सरस्वती पूजा का अर्थ केवल ज्ञान की देवी की वंदना और गुड़-चने का प्रसाद पाने तक सीमित था। उस समय के छात्रों को यह बोध नहीं था कि 'ज्ञान' का वास्तविक अर्थ क्या है और जिस सरस्वती की हम पूजा करते हैं, उनका ऐतिहासिक और भौगोलिक अस्तित्व क्या था।
सरस्वती नदी: इतिहास और शोध की नई दिशा
लंबे समय तक इतिहास की पुस्तकों में हमें पढ़ाया गया कि भारतीय सभ्यता 'सिंधु घाटी सभ्यता' है, क्योंकि सरस्वती नदी के अस्तित्व को नकार दिया गया था। किंतु 1970 दशक में डॉ. वाकणकर और मोरोपंत पिंगले जी के नेतृत्व में 'सरस्वती शोध यात्रा' ने इस धारणा को बदल दिया। पद्मश्री दर्शनलाल जैन और श्रीमान कल्याण रमन जैसे शोधार्थियों के प्रयासों से आज विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि भारतीय सभ्यता वास्तव में सरस्वती नदी के तट पर विकसित हुई थी।
वैज्ञानिक प्रमाण और पुरातात्विक साक्ष्य
आज इसराे, आेएनजीसी, आइआईटी रुड़की और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जैसे संस्थानों ने सैटेलाइट इमेज और ग्राउंड वाटर रिसर्च के माध्यम से सिद्ध कर दिया है कि सरस्वती नदी का अस्तित्व था। हरियाणा के राखीगढ़ी, कुणाल और भिराना जैसे पुरातात्विक स्थल इसी नदी के प्राचीन मार्ग (पैलियो-चैनल) पर स्थित हैं। ऋग्वेद में सरस्वती को "अम्बितमे, नदीतमे और देवीतमे" (सर्वश्रेष्ठ माता, सर्वश्रेष्ठ नदी, सर्वश्रेष्ठ देवी) कहकर सम्मानित किया गया है।
भौगोलिक विस्तार और ऐतिहासिक पतन
सरस्वती नदी हिमालय के बंदरपूंछ हिमनद से निकलकर आदिबद्री के मार्ग से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात होते हुए कच्छ के रण में समुद्र से मिलती थी। लगभग 1600 किलोमीटर लंबी और 3 से 12 किलोमीटर चौड़ी यह विशाल नदी भू-परिवर्तनों के कारण ईसा पूर्व 4000 वर्ष के आसपास सूख गई। महाभारत काल में बलराम जी ने इसी नदी के किनारे तीर्थ यात्रा की थी। इसके तट पर मार्कंडेय, वशिष्ठ और विश्वामित्र जैसे ऋषियों के आश्रम थे और यहीं वेदव्यास जी ने भागवत पुराण की रचना की थी।
'सा विद्या या विमुक्तये': शिक्षा और विद्या में अंतर
विष्णु पुराण में कहा गया है— "सा विद्या या विमुक्तये" अर्थात् विद्या वही है जो मुक्ति दिलाए। आज की आधुनिक शिक्षा हमें 'नियुक्ति' (रोजगार) तो दिलाती है, लेकिन मुक्ति नहीं। भौतिक शास्त्र, रसायन और जीव विज्ञान जैसे विषय नश्वर जगत तक सीमित हैं। भारतीय परंपरा में दो प्रकार के शास्त्र विकसित हुए— भौतिक और अभौतिक। माधवाचार्य के 'सर्वदर्शन संग्रह' में वर्णित 16 दर्शनों में से 16 दर्शन हमें मोक्ष, समाधि और निर्वाण की ओर ले जाते हैं। यही वास्तविक 'विद्या' है।
वसंत पंचमी: संकल्प का पर्व
वसंत पंचमी केवल एक सामाजिक त्योहार नहीं, बल्कि आत्म-बोध का पर्व है। तेलंगाना के 'बासर' स्थित सरस्वती मंदिर में आज भी बच्चों का 'विद्यारम्भ संस्कार' इसी उद्देश्य से किया जाता है। सच्ची सरस्वती पूजा का अर्थ है— इन 15 शास्त्रों में से किसी एक को सीखना और उसके अनुसार आचरण करना।
भारतीय सभ्यता के मूल को समझने के लिए सरस्वती के प्रवाह को अपनी बुद्धि में पुनः जीवित करना आवश्यक है। इसके लिए संस्कृत भाषा और व्याकरण की नींव रखना पहला कदम है। आइए, इस वसंत पंचमी पर यह संकल्प लें कि हम संस्कृत सीखना आरंभ करेंगे और कम से कम एक भारतीय शास्त्र का अध्ययन कर माँ सरस्वती की सच्ची उपासना करेंगे।
लेखक: अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख,संस्कृत भारती हैं

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
भारत एक धर्म प्रधान देश हैं। यहां साल के सभी दिनो का महत्व होता है तथा साल का हर दिन पवित्र माना जाता है। भारत में करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब का पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
विजयादशमी का पर्व हमें सिखाता है कि सत्य के प्रति आस्था के साथ उसकी रक्षा का साहस भी आवश्यक है। न्याय की कामना तभी फलित होती है, जब समाज उसके लिए खड़ा होने का संकल्प लेता है।
हर साल 17 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस" गरीबी मिटाने के लिए जनजागृति हेतु पुरे विश्व में मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस साल 2026 को “सभी के लिए सुरक्षित घर” यह थीम हैं।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को 85 पदक दिलाए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत के खाते में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक आए। इस उपलब्धि की सबसे गौरवपूर्ण तस्वीर यह है कि महिला खिलाड़ियों ने 38 पदक अपने नाम किए, जो पुरुष खिलाड़ियों के बराबर हैं।
लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन, राजनीतिक सफर, प्रधानमंत्री कार्यकाल, ‘जय जवान जय किसान’ नारे और उनकी सादगी व राष्ट्रसेवा से जुड़ी प्रेरक कहानी पढ़ें।
महात्मा गांधी के जीवन और विचारों से जुड़ी 10 ऐसी सीख, जो आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सादगी, अनुशासन, सत्य, समय प्रबंधन, संयम और आत्मविकास का मार्ग दिखा सकती हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही असाधारण यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों तक उन्होंने शासन की एक ऐसी शैली विकसित की, जिसमें विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखा गया।
मोदी जी की कूटनीतिक परिपक्वता का प्रमाण है, जिसने पूर्व में जी-20 के मंच पर भी विश्व को चकित किया था। लगभग सात वर्ष बाद चीनी और रूस जैसे देशों को एक साथ एक मंच पर लाना निःसंदेह उनकी उसी भगीरथ भूमिका की पुष्टि करता है, जिसके बल पर वे उभरती बहुध्रुवीय विश्व-व्यवस्था में भारत को केंद्रीय स्थान दिला चुके हैं।
विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 17 सितंबर 2026 विशेष। जानिए भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत, ग्रामीण इलाकों की चुनौतियां, नकली दवाओं का साम्राज्य और मरीज सुरक्षा से जुड़े कड़े सवाल।
1947 में 34 करोड़ से बढ़कर 2026 में 147 करोड़ पहुंची भारत की आबादी।