वाराणसी के अघोर पीठ पड़ाव आश्रम में अघोरेश्वर भगवान राम जी की 89वीं जयंती और बाबा कीनाराम जी की 425वीं जन्म षष्ठी पर्व धूमधाम से मनाई जा रही है। दो दिवसीय अखंड संकीर्तन, हवन-पूजन और भक्तिमय कार्यक्रमों में देशभर से श्रद्धालु सम्मिलित हो रहे हैं।

हाइलाइट्स
वाराणसी, स्टार समाचार वेब
शुक्रवार को अघोर पीठ, आश्रम, पड़ाव में लोलार्क षष्ठी पर्व की धूम रही। शुक्रवार को श्री सर्वेश्वरी समूह संस्थान देवस्थानम, अवधूत भगवान राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव, वाराणसी में अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम का 425 वां जन्म षष्ठी (लोलार्क षष्ठी) पर्व श्री सर्वेश्वरी समूह के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव रामजी के सान्निध्य में भक्तिमय वातावरण में मनाया गया। इसी के साथ अघोरेश्वर भगवान राम जी के 89वें जयंती पर्व के दो दिवसीय कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर प्रात:कालीन सफाई श्रमदान के बाद सुबह 8:00 बजे पूज्यपाद बाबा गुरुपद संभव राम जी ने महाराजश्री बाबा कीनाराम जी की प्रतिमा का विधिवत पूजन किया। लोलार्क षष्ठी पर्व के अवसर पर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम की प्रतिमा के दर्शन करने भक्तों की कतार लगी रही।
देवी मंदिर की पंच परिक्रमा कर अखंड कीर्तन की शुरूआत
श्री सर्वेश्वरी समूह पड़ाव आश्रम वाराणसी के संयुक्त मंत्री अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि इस अवसर पर अघोर शोध संस्थान के निदेशक डॉ. अशोक कुमार सिंह द्वारा सफलयोनि का पाठ किया गया। इसके पश्चात पूज्य बाबा ने आश्रम के उपासना स्थल (चिरकुट देवी विहार) में हवन-पूजन के बाद दो दिनों तक चलने वाले अखंड संकीर्तन‘अघोरान्ना परो मन्त्र: नास्ति तत्वं गुरो: परम’ का शुभारम्भ देवी मन्दिर की पञ्च परिक्रमा करके किया। उल्लेखनीय है कि भाद्र शुक्ल सप्तमी तदनुसार आज शनिवार को परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी की 89वीं जयंती मनाई जाएगी। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न प्रान्तों से आए संस्था के सदस्य, भक्त व श्रद्धालुगण सम्मिलित हो रहे हैं।
राष्ट्र के रक्षार्थ अघोरेश्वर महाप्रभु के संदेश
आज लोगों में आधुनिक बनने और बने रहने की होड़ मची हुई है, इसीलिए हम उच्च या उच्चतर शिक्षा का प्रमाण लेने के बावजूद सही अर्थों में शिक्षित नहीं हो पा रहे हैं। आज देश के कथित भाग्यविधाताओं ने शिक्षण संस्थानों में ऐसी व्यवस्था दी है कि वहाँ से निकल?ने वाले युवा न तो भारतीय संस्कारों और संस्कृति से सुसज्जित हो पा रहे हैं और ना ही ईमानदारीपूर्ण स्वरोजगार से परिवार का भरण-पोषण करने लायक बन पा रहे हैं। आजादी के बाद इस देश की जनता आस लगाये थी कि सत्ताधारी लोग हमारा अमन-चैन वापस लायेंगे, हमारी शिक्षा व्यवस्था वापस आयेगी, क्षत-विक्षत सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण होगा, लेकिन दुर्भाग्यवश ऐसा कुछ भी हुआ नहीं। लुटेरे विदेशी शासकों ने हमारे समाज को बाँटने और बंटे हुए टुकड़ों को परस्पर लड़का का जो अक्षम्य काम किया था, उसमें सुधार के बजाय उत्तरोत्तर गिरावट ही होती गई। परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी ने भारत पुत्रों को सचेत करते हुए कहा है कि ‘हम अपने देश भारत को भारतमाता के नाम से सम्बोधित करते हैं, पूजते हैं। भारतमाता हमारा पालन-पोषण करती हैं। हम उन्हीं की संतान हैं। आज हमारे देश में कटुता, ईर्ष्या को जन्म देने वाले बहुत हैं। हमें इनसे सावधान होना चाहिए। मैत्री तो ये दे नहीं सकते। इसकी सम्भावना अब बिल्कुल कम हो गयी है। बहुतेरे नवागन्तुक मत-मतान्तर यहां जहां-तहां जंगल-पहाड़ों, नगरों-ग्रामों में ठहर गये हैं। इन आगन्तुकों का मातृभूमि से कोई सम्बन्ध नहीं है। भारतमाता की औलाद से कोई सम्बन्ध नहीं है। यही दिखता है। यही कारण है कि इनके आने के लिए हमारे राष्ट्र के नेतागण ही पूर्णत: सहयोग करते हैं। यह ऋषियों का देश है, जो ग्रामों में रहने वाला है। यह मुनियों का देश है, जो जंगलों और पहाड़ों में रहकर उस परा-प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि मनुष्य की मानवता बनी रहे। किन्तु 'वे' बनने नहीं देते । 'वे' मानी कौन ? वे हैं- हमारे प्रान्तों और राष्ट्र के श्वेत वस्त्रधारी नेतागण, अगुआ लोग, जो नेतृत्व करते हैं, अगुआई करते हैं और, न चाहने पर भी, विघटन की प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं । अभ्यन्तर के देवता ! तूं इन्हें सुदृष्टि दो, तूं इन्हें सद्विचार दो, जिससे हम सब देशवासी अपने शीर्षस्थ गुरुजनों, सर्वश्रेष्ठ बुजुर्गों के उत्तम कृत्यों की परम्परा से कभी विचलित न हों। पथच्युत न हों । इसी अर्थ में साधुता को भी जानना होगा, तुम्हें। आजकल समाज में, देश में, झूठ को सच और सच को झूठ करने में जुटे हुए लोगों में विघटन को प्रोत्साहन देने की प्रवृत्ति की जो होड़ लगी है, उससे तुम्हें निवृत्त रहना होगा, सावधान रहना होगा। पर्यावरणीय संकट के बाद मानव समाज को सर्वाधिक खतरा धर्म की गलत समझ और व्याख्या से है। आज हर धर्म के कथित धर्माचार्य अपने-अपने ईश्वर को सर्वश्रेष्ठ साबित करने में विष-वमन कर रहे हैं। परमपूज्य अघोरेश्वर के संदेश सम्पूर्ण मानव समाज के कल्याण के लिए हैं। ये अमृतमयी वाणियां धर्म, मजहब, जात-पात, ऊँच-नीच, भाषा-क्षेत्रीयता इत्यादि के भेद से परे हैं और इन्हें अनपढ़ लोग भी समझकर स्वंय व दूसरों का भला करते हैं। इसीलिए अघोरेश्वर महाप्रभु को मानने वाले या उनकी संस्था ह्यश्री सर्वेश्वरी समूहह्ण में विश्वास करने वाला अपार जनसमूह उनकी अमृत वाणियों को शास्त्रों से भी कहीं बहुत ज्यादा महत्व देता है। धर्म के विषय में गुमराह न होने का संदेश देते हुए उन्होंने कहा है कि ‘मजहब का हौवा खड़ा करने वाले, खून-खराबा, लूट-पाट, आगजनी के सब जघन्य अपराध और कुकृत्य करते हैं और कहते हैं कि यह सब धर्म है। अरे मूर्ख ! तुम्हारे पूर्वजों ने इन कृत्यों को कभी धर्म कहा है ? तुम्हारे शास्त्र भी यह नहीं कहते। जब तूँ ही अपने मुख से कह रहे हो कि "हरि को हर में देख" चाहे वह किसी मजहब का हो, तो घृणित कर्म, धर्म कैसे हो सकता है ? खून-खराबा और पारस्परिक लूट-पाट, महा-पीड़ा, महा-दु:ख की जननी बन गयी है। ऐसे कृत्य करने वाले मनुष्य, राष्ट्र या समाज, तरुण युवकों को गुमराह कर धर्म और ईश्वर के नाम पर धूल झोंकने वाले सरीखे जान पड़ते हैं रे ! मनुष्य-मनुष्य में भेद पैदा करते हैं। मनुष्य-मनुष्य के साथ, भाई-भाई के साथ, एक जाति दूसरी जाति वाले के साथ, एक मजहब के अनुयायी दूसरे मजहब के अनुयायियों के साथ धोखा-धड़ी कर खून-खराबा जैसे महाघृणित कृत्य के जन्मदाता बने हुए हैं। क्या यही धर्म है ? तरुण युवकों ! जागो, आँखें खोलो, देखो ये कौन लोग हैं? इन लोगों को अपने देश, अपने समाज में कोई स्थान न देने की प्रतिज्ञा करो। संकल्प करो। धर्म ऐसा नहीं होता। स्वप्न में भी धर्म का रूप ऐसा नहीं होता। धर्म एक-दूसरे के साथ मैत्री कारक होता है। स्नेह कारक होता है। धर्म के बारे में और धार्मिकता रखने वालों के बारे में ऐसा सन्देह नहीं करना। धर्म तो संवेदनशील होता है। धर्म वट-वृक्ष सा है। सभी को छाया प्रदान करने वाला है, चाहे वे किसी जाति-मजहब के क्यों न हों। धर्म आदर देने वाला, दिलाने वाला होता है। धर्म के अभाव में विकृति पनपती है। भयावह कलंक जन्म लेता है, पनपता है। धर्म के अभाव में मनुष्य का आचरण सींग वाले पशुओं की तरह हो जाता है। वे पिछले पाँव फेंकने वाले गदहे की तरह हो जाते हैं। ऐसा आचरण करने वाले को तुम विवेकहीन समझना। न वहाँ ईश्वर होते हैं और न वहाँ परमेश्वर होते हैं। न भगवान, न भगवती, न गुरु। वहाँ इनमें से कोई नहीं होता। वे तो वहाँ होते हैं, जहाँ धर्म होता है। वे वहाँ नहीं होते जहाँ कुकर्म, कुकृत्य, एक-दूसरे के साथ घृणा, लूट-पाट, खून-खच्चर होते हैं। इन आततायियों के यहाँ धर्म कहाँ, ईश्वर कहाँ पाये जायेंगे। आज जैसा वातावरण है, वह धर्म नहीं है।
- डॉ. बामदेव पाण्डेय
राज्यसभा के दस सांसदों को एम्स, सिल्क बोर्ड, सरोगेसी बोर्ड और संसदीय समितियों में निर्विरोध निर्वाचित किया गया है। जानिए किस सांसद को कौन सी बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हथियार की जांच के दौरान एक यात्री की लाइसेंसी पिस्टल से गोली चल गई। इस हादसे में एक महिला समेत दो एयरपोर्ट कर्मचारी घायल हो गए। आरोपी यात्री की पहचान शिवसेना नेता कमलेश राय के रूप में हुई है, जो मुंबई जा रहे थे।
दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर तीखा हमला बोला है।
उत्तर भारत में मानसून की भीषण बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में भारी बारिश, जलभराव और भूस्खलन ने तबाही मचा रखी है। प्रयागराज में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में भीषण सड़क हादसा हो गया। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि चार घायल हो गए। घायलों में एक बच्चा भी शामिल है। पुलिस ने सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया है। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट से लगातार पांच बार विधायक रहे और टीएमसी सरकार में पूर्व मंत्री व विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर 75 वर्षीय डॉ. आशीष बनर्जी का शव रविवार सुबह उनके आवास के पास स्थित पार्टी कार्यालय में फंदे से लटकता मिला।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बलों और CAPF के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों की घोषणा की है। यहाँ कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र और सेना मेडल विजेताओं की पूरी सूची देखें।
80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्र के नाम संबोधन की विस्तृत जानकारी। विकसित भारत 2047, विदेश नीति, कल्याणकारी योजनाएं और भाषण की सात बड़ी बातें पढ़ें।
पूर्व विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और पानी साथ नहीं चल सकते और पाकिस्तान अपने आंतरिक संकटों के कारण बिखर रहा है।
भारत में 2026-27 की जनगणना के लिए केंद्र सरकार ने 40 सवालों की नई सूची जारी कर दी है। इसमें पहली बार जाति, कोविड-19 टीकाकरण का स्थान, बैंक खाता और डिजिटल साक्षरता जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल शामिल किए गए हैं।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह