सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण मामले में मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने जांच समिति पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट के सभी स्टे आर्डर निरस्त कर दिए हैं।

नई दिल्ली/ भोपाल। स्टार समाचार वेब
राजधानी भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार को करारा झटका दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाने संबंधी दलीलों को खारिज कर दिया। साथ ही, इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश यानी स्टे ऑर्डर (Stay Orders) को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत चल रही जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन की पैरवी कर रहे अधिवक्ता को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने दो टूक कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के समानांतर किसी अन्य प्रक्रिया या स्थानीय जांच समिति के गठन के माध्यम से न्यायिक कार्रवाई को प्रभावित करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, नगर निगम की ओर से अदालत को यह जानकारी दी गई कि निगम शहर में हो रहे अवैध निर्माण और आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन प्रशासनिक और अन्य स्तरों पर आने वाली बाधाओं के कारण प्रभावी कदम उठाने में रुकावटें आ रही हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि कानून के पालन में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम से पहले, रविवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस गंभीर मसले को लेकर राजधानी के जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद अब यह माना जा रहा है कि भोपाल शहर में आवासीय भूखंडों पर अवैध रूप से संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नगर निगम का बुलडोजर और सीलिंग अभियान एक बार फिर बेहद तेज गति से शुरू होगा। अदालत ने साफ संकेत दे दिए हैं कि भूमि उपयोग के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तय कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई लगातार जारी रखी जाएगी।
एक तरफ जहां अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों पर कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। भोपाल के मास्टर प्लान को तत्काल लागू कराने की प्रमुख मांग को लेकर मध्य विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अपने समर्थकों के साथ धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी शहर के सुव्यवस्थित, संतुलित और सुनियोजित विकास के लिए आधुनिक मास्टर प्लान का होना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से पुरजोर मांग की कि शहरहित में जल्द से जल्द मास्टर प्लान लागू किया जाए, ताकि समाज के हर वर्ग और छोटे व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के शुरुआती निर्देशों के बाद भोपाल नगर निगम ने शहर के कई बड़े अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चिन्हित कर नोटिस जारी किए थे और सीलिंग की कार्रवाई शुरू कर दी थी। इस कार्रवाई के विरोध और व्यापारियों के दबाव के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस पूरे प्रकरण की समीक्षा के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की एक 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का गहराई से अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सौंपनी थी और रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को कुछ राहत देने की बात कही गई थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और स्टे खारिज होने से स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। इस मामले की अगली और बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई अब आगामी 15 सितंबर को होगी।
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