केंद्र सरकार ने आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के लिए वेतन भुगतान के सख्त नियम जारी किए हैं। जानें मासिक, साप्ताहिक और दैनिक वेतन की नई समयसीमा और उल्लंघन पर होने वाली कार्रवाई के बारे में।

केंद्र सरकार ने आउटसोर्सिंग और संविदा (Contractual) पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब इन कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की भांति ही निर्धारित समय सीमा के भीतर वेतन का भुगतान करना अनिवार्य होगा। 'वेतन संहिता 2019' के तहत लागू इन नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को सरकार द्वारा ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान किया गया है।
नए नियमों के तहत विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए भुगतान के अलग-अलग अंतराल तय किए गए हैं, ताकि उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके:
दैनिक वेतनभोगी: शिफ्ट खत्म होते ही भुगतान करना होगा।
साप्ताहिक कर्मचारी: हफ्ते की छुट्टी (Weekly Off) से पहले वेतन देना अनिवार्य है।
पाक्षिक कर्मचारी: पखवाड़ा (15 दिन) समाप्त होने के 2 दिनों के भीतर भुगतान करना होगा।
मासिक कर्मचारी: अगले महीने की 7 तारीख तक हर हाल में वेतन मिल जाना चाहिए।
सरकार ने भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए नकद लेनदेन पर रोक लगा दी है। अब ठेकेदारों को अनिवार्य रूप से बैंक ट्रांसफर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ही वेतन देना होगा। इसके साथ ही, मुख्य नियोक्ताओं (Principal Employers) को यह सुनिश्चित करना होगा कि अनुबंध करने से पहले पर्याप्त बजट उपलब्ध हो। इसके लिए GeM पोर्टल या अन्य माध्यमों पर पूरे अनुबंध काल के लिए फंड ब्लॉक करने के निर्देश दिए गए हैं।
भुगतान में होने वाली प्रशासनिक देरी को खत्म करने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया तय की गई है। ठेकेदारों को महीने की 10 तारीख तक अपने बिल जमा करने होंगे। इसके बाद संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे 15 तारीख तक उन बिलों को पास करें, ताकि कर्मचारियों के वेतन में कोई बाधा न आए।

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