चित्रकूट दीपावली अमावस्या मेले में 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है, लेकिन लोहरौरा से सोहावल तक अधूरी सड़क और पुलों का निर्माण सतना की यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
चित्रकूट के दीपावली अमावस्या मेले की तारीख कोई अचानक घोषित होने वाला आयोजन नहीं है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और प्रशासन को महीनों पहले से इसकी जानकारी रहती है। इस बार भी 6 से 10 नवंबर तक आयोजित होने वाले मेले में 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान प्रशासन को है। घाटों की सफाई, परिक्रमा मार्ग, सुरक्षा, पार्किंग और यातायात प्रबंधन को लेकर तैयारियां चल रही हैं, लेकिन श्रद्धालुओं को चित्रकूट तक पहुंचाने वाले मार्ग की बदहाली ने पूरी तैयारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
राम वन गमन पथ का निर्माण अधूरा है और लोहरौरा से सोहावल के बीच करीब तीन किलोमीटर सड़क तथा पुलों का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। नतीजतन यह कि चित्रकूट जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से निकलना पड़ रहा है। मेले के दौरान यही रास्ते सतना शहर के मोहल्लों में लाखों श्रद्धालुओं के वाहनों का दबाव बढ़ा सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मेले की तारीख पहले से तय थी और श्रद्धालुओं की संख्या का अनुमान भी प्रशासन को था, तो फिर सड़क निर्माण और मरम्मत की तैयारी समय रहते क्यों नहीं की गई? क्या जिम्मेदार विभागों को इस मार्ग की अहमियत का अंदाजा नहीं था या फिर समयसीमा तय होने के बावजूद काम पूरा कराने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई?
लोहरौरा से शुरू होती है बदहाली, गड्ढे व कीचड़ से पटा रास्ता बना मुसीबत
सतना से चित्रकूट की ओर बढ़ते ही लोहरौरा से सड़क की दुर्दशा सामने आने लगती है। आदित्य कॉलेज से सोहावल तक करीब तीन किलोमीटर का हिस्सा अब तक तैयार नहीं हो पाया है। इस मार्ग पर प्रस्तावित पुलों का निर्माण भी अधूरा है। कहीं बड़े-बड़े गड्ढे हैं तो कहीं सड़क का नामोनिशान नहीं बचा। सूखे मौसम में वाहनों के साथ धूल के गुबार उड़ते हैं और थोड़ी सी बारिश होते ही पूरा रास्ता कीचड़ तथा जलभराव में तब्दील हो जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक साल से अधिक समय से यह स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों और राहगीरों को रोजाना इसी परेशानी से गुजरना पड़ रहा है। सवाल यह भी है कि निर्माण कार्य आखिर किस वजह से रुका हुआ है? ठेका संबंधी अड़चन है, विभागीय लापरवाही है या फिर निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय नहीं की गई? न तो काम पूरा होने की स्पष्ट समयसीमा सामने है और न ही प्रभावित लोगों को कोई भरोसेमंद जवाब मिल रहा है।
अधूरी सड़क का रास्ता अब शहर की गलियों से, हादसों का खतरा
आदित्य कॉलेज से सोहावल तक का मार्ग तैयार नहीं होने के कारण चित्रकूट जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। एक रास्ता आदित्य कॉलेज मोड़ से महदेवा, धवारी होते हुए कलेक्ट्रेट रोड और सिविल लाइन की ओर जाता है। दूसरा रास्ता महदेवा से क्रिस्तुकुला रोड और पतेरी होते हुए चित्रकूट मार्ग से जुड़ता है। ये दोनों मार्ग मुख्य राजमार्ग नहीं, बल्कि मोहल्लों और कॉलोनियों के संपर्क रास्ते हैं। इनकी चौड़ाई और यातायात क्षमता सीमित है। सामान्य दिनों में ही स्थानीय वाहनों की आवाजाही से इन पर दबाव रहता है। ऐसे में दीपावली मेले के दौरान कारों, बसों और दूसरे वाहनों का रेला इन संकरी सड़कों से गुजरा तो दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ना तय है। तेज रफ्तार से निकलने वाले भारी और छोटे वाहन पैदल चलने वालों, बच्चों और स्थानीय दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। लगातार वाहनों की आवाजाही से पहले से कमजोर मोहल्ला सड़कों के टूटने और क्षतिग्रस्त होने की आशंका भी है। इसका असर केवल संबंधित मोहल्लों तक सीमित नहीं रहेगा। सतना शहर पहले से ही जाम की समस्या से जूझ रहा है। कलेक्ट्रेट रोड, सिविल लाइन और प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त यातायात का दबाव बढ़ने से सामान्य आवागमन बाधित हो सकता है। एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं के वाहनों को भी रास्ता मिलने में परेशानी हो सकती है। यानी तीन किलोमीटर की अधूरी सड़क का खामियाजा पूरे शहर को भुगतना पड़ सकता है।
तैयारी पर सवाल
सड़क की बदहाली के बीच सरकारी कामकाज की समयसारिणी भी सवाल खड़े करती है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सतना-चित्रकूट राष्ट्रीय राजमार्ग के किलोमीटर 0 से 79 तक के अल्पकालीन रखरखाव के लिए 1 अक्टूबर को करीब 24.99 करोड़ रुपये की निविदा जारी की। इसकी बोली जमा करने की अंतिम तारीख 3 नवंबर और बोली खोलने की तारीख 4 नवंबर निर्धारित की गई, जबकि दीपावली मेला 6 नवंबर से शुरू होना है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस मार्ग पर लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही होनी है, उसके रखरखाव की निविदा प्रक्रिया मेले से महज दो दिन पहले पूरी होने की स्थिति में क्यों पहुंची? क्या इतनी महत्वपूर्ण सड़क की मरम्मत और रखरखाव की योजना पहले नहीं बनाई जा सकती थी? दूसरी ओर सतना-मझगवां-चित्रकूट के 77.102 किलोमीटर मार्ग को दो लेन से चार लेन में बदलने के लिए मौजूदा सड़क को जर्जर अवस्था में ही छोड़ रखा गया है। एक तरफ बड़े मार्ग के विकास की योजनाएं अटकी हैं और दूसरी तरफ मौजूदा सड़क की हालत यात्रियों के लिए मुसीबत बनी हुई है।
अक्टूबर के अंत तक थे काम पूरा करने के निर्देश
15 अक्टूबर को मार्ग की बदहाली का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को अक्टूबर के अंत तक मरम्मत कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे। अक्टूबर गुजर गया और दीपाली के चंद दिन बचे हैं इसके बावजूद बदहाली दूर नहीं हुई। क्या लोहरौरा से सोहावल के बीच अधूरे हिस्से और पुलों को लेकर कोई ठोस व्यवस्था बनाई गई है? क्या वैकल्पिक मार्गों पर यातायात नियंत्रण, गति सीमा और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं? चित्रकूट में पार्किंग और यातायात प्रबंधन की तैयारियां अपनी जगह हैं, लेकिन सतना से आने वाले वाहनों का शहर की गलियों में प्रवेश रोकने या व्यवस्थित करने की योजना क्या है?
गलती करे जिम्मेदार, भोगे जनता
धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के नाम पर बनाई जा रही परियोजना का उद्देश्य श्रद्धालुओं का सफर सुगम करना था, लेकिन अधूरे निर्माण ने ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है। अब दीपावली मेले में यही अधूरापन सतना शहर की यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। सवाल सिर्फ तीन किलोमीटर सड़क का नहीं, बल्कि उन जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों की जवाबदेही का है, जिन्हें मेले की तारीख मालूम थी, कलेक्टर के निर्देश भी मिले थे और काम पूरा कराने का पर्याप्त अवसर भी था। फिर भी सड़क अधूरी क्यों है? श्रद्धालुओं और शहरवासियों को इस लापरवाही की कीमत क्यों चुकानी पड़े?
ग्रामीणों की परेशानी, जिम्मेदारों से सीधे सवाल
आप स्वयं सड़क देखिए। हम पढ़ने आते हैं, लेकिन कॉलेज तक पहुंचने में बहुत दिक्कत होती है। इस सड़क को जल्द बनाना चाहिए।
दीपांशु, विद्यार्थी, छात्र, आदित्य कालेज
सड़क खत्म हो चुकी है। यहां से वाहन डोलते हुए निकलते हैं। गांव से आकर जब मैं यहां चलता हूं और बगल से कोई वाहन गुजरता है तो लगता है कि कहीं वह ऊपर ही न गिर जाए।
चंद्रपकाश द्विवेदी, निवासी अटरा
थोड़ी सी भी बूंदाबांदी होती है तो पूरी सड़क पर कीचड़ हो जाता है। पैदल चलने में भी कई जगह घुटनों तक पानी भर जाता है। रोज लोग गिरकर घायल होते हैं। एक साल से यही समस्या बनी हुई है।
रामकिशोर यादव, ग्रामीण
हमारी यहां दुकान है। सड़क से दिनभर धूल उड़ती है, जिससे सारा सामान खराब हो जाता है। सड़क नहीं होने के कारण यहां पानी भर जाता है और ग्राहक भी नहीं आते।
सरोज साहू, निवासी आदित्य कालेज मोड़
प्रशासन को जनता की तकलीफ का ध्यान देना चाहिए। एक साल से अधिक समय से सड़क का काम बंद है। गड्ढों और कीचड़ के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। इसे जल्द ठीक कराया जाना चाहिए।
अनिल प्रजापति, महदेवा
सबसे बड़ी चिंता यह है कि अधूरी सड़क के कारण मेले में जाने वाले वाहनों का रेला मोहल्लों की संकरी गलियों से गुजरेगा। अगर वाहन तेज रफ्तार से निकलने लगे तो पैदल चलने वालों और बच्चों के लिए हादसे का खतरा बढ़ जाएगा।
नागेंद्र गौतम रिंकू, महदेवा

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