दिल्ली शराब घोटाला मामले में कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी कर दिया है। जानें क्या थी CAG की रिपोर्ट और इस मामले का पूरा घटनाक्रम।
By: Ajay Tiwari
Feb 27, 202611:23 AM
मुख्य बातें
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
Liquor Policy Case Verdict: दिल्ली की कथित आबकारी नीति (Liquor Policy Case) मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेतृत्व के लिए राहत भरी खबर आई है। अदालत ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को इस मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पर्याप्त सबूतों के अभाव में लगाए गए आरोप साबित नहीं होते हैं।

केजरीवाल की कानूनी लड़ाई
अरविंद केजरीवाल इस मामले में लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया का सामना कर रहे थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद 26 जून को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने उन्हें हिरासत में लिया था। सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम और नियमित जमानत मिलने के बाद वे 13 जुलाई 2024 को जेल से बाहर आए थे। अब कोर्ट के ताजा फैसले ने उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया है।

केजरीवाल की प्रतिक्रिया
CAG रिपोर्ट और राजस्व हानि के दावे
इस विवाद की जड़ में कैग (CAG) की वह रिपोर्ट थी, जिसमें दिल्ली सरकार की शराब नीति में गंभीर खामियों का दावा किया गया था। क्या कहा गया था रिपोर्ट में-
राजस्व का नुकसान: रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नई नीति के कारण सरकारी खजाने को लगभग 2026 करोड़ रुपये के राजस्व की हानि हुई।
नियमों की अनदेखी: कथित तौर पर मंत्रियों के समूह (GoM) ने विशेषज्ञ पैनल के सुझावों को दरकिनार कर दिया था। इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण फैसलों के लिए उपराज्यपाल (LG) की अनिवार्य मंजूरी नहीं ली गई थी।
लाइसेंस आवंटन में गड़बड़ी: रिपोर्ट के अनुसार, घाटे में चल रही कंपनियों को भी लाइसेंस दिए गए या उनके लाइसेंस का नवीनीकरण किया गया, जो नियमों के विरुद्ध था।
कोर्ट ने इन सभी तकनीकी पहलुओं और जांच एजेंसियों के दावों की समीक्षा के बाद यह पाया कि आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं हैं।
कोर्ट ने क्या कहा..
साजिश का एक ढांचा प्रस्तुत करने की कोशिश
जितेंद्र सिंह, विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट)