होर्मुज तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोना ₹1.51 लाख और चांदी ₹2.50 लाख के पार। जानें क्या यह निवेश का सही समय है और कितनी सुरक्षा प्रदान करती हैं ये धातुएं।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
वैश्विक अस्थिरता और होर्मुज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के बीच, सोना और चांदी एक बार फिर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। वर्तमान में इन कीमती धातुओं को 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित निवेश) माना जा रहा है, लेकिन उच्च उतार-चढ़ाव ने रणनीतिक निवेश की आवश्यकता को बढ़ा दिया है।
ऐतिहासिक रूप से, जब वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आती है या युद्ध जैसी स्थितियां पैदा होती हैं, तो निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं। मई 2026 की शुरुआत में, मध्य पूर्व में राजनयिक और सैन्य हलचल के कारण सोने की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जो ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया है। विशेषज्ञ सोने को एक "बीमा पॉलिसी" की तरह देखते हैं जो मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के खिलाफ पोर्टफोलियो को सुरक्षा प्रदान करता है। हालांकि, ऊंचे ब्याज दर और डॉलर की मजबूती जैसे कारक समय-समय पर इसकी कीमतों में सुधार (Correction) भी लाते हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए जोखिम बना रहता है।
चांदी वर्तमान में सोने की तुलना में अधिक आक्रामक रुख दिखा रही है। 6 मई 2026 को चांदी की कीमतों में 2.6% से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिससे यह ₹2.50 लाख प्रति किलो के पार पहुंच गई। चांदी की विशेषता यह है कि यह निवेश के साथ-साथ एक औद्योगिक धातु भी है, जिसकी मांग सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निरंतर बनी रहती है। हालांकि, युद्ध के दौरान आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने पर चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक गिरावट भी देखी जा सकती है, जिससे यह एक "दोधारी तलवार" बन जाती है।
वर्तमान बाजार की अत्यधिक अस्थिरता (30% से अधिक वार्षिक उतार-चढ़ाव) को देखते हुए, निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। जानिए जानकारों का क्या कहना है-
संतुलित पोर्टफोलियो: कुल निवेश का 5-10% हिस्सा ही सोने और चांदी में रखना चाहिए।
दीर्घकालिक नजरिया: सोने को पोर्टफोलियो स्टेबलाइजर के रूप में देखें, न कि केवल त्वरित लाभ के लिए।
चांदी में सावधानी: उच्च जोखिम सहने वाले निवेशक ही चांदी में भारी निवेश करें, क्योंकि इसकी कीमतें सोने के मुकाबले दो से तीन गुना अधिक तेजी से गिर या बढ़ सकती हैं।
वैश्विक बाजार में तांबा, एल्युमीनियम जैसी औद्योगिक धातुओं की कीमतें बढ़ने से आगामी त्योहारी सीजन में घरेलू उपकरण और गाड़ियां 8% तक महंगी हो सकती हैं।
आज भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में रहे। निवेशकों ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, कमजोर वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों के बीच सतर्क रुख अपनाया है। वहीं शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले छह पैसे गिरकर 95.28 पर आ गया।
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का ऑफर फॉर सेल शानदार प्रतिक्रिया के साथ बंद हुआ। सरकार ने 31,552 करोड़ रुपये जुटाए, जिससे सार्वजनिक शेयरधारिता 10% पहुंच गई।
भारतीय घरेलू शेयर बाजार ने आज सकारात्मक शुरुआत की। कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ खुले। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 201.43 अंक चढ़कर 78,782.43 पर पहुंच गया।
RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है। वैश्विक महंगाई और अनिश्चितताओं के चलते लोन और ईएमआई में फिलहाल कोई कटौती नहीं होगी।
वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ और ईपीएस के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जानिए इसके नियम, कंपनियों और सरकार पर पड़ने वाले असर की पूरी जानकारी।
सरकार ने LIC में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 6.5% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। इसके लिए फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। जानिए इससे जुड़ी सभी खास बातें, शेयर बाजार पर असर और पूरी डिटेल।
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। महीने के दूसरे कारोबारी दिन यानी आज 30 शेयरों वाला बीएसई सेसेंक्स बढ़त के साथ कारोबार करते हुए हरे निशान पर खुला। वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी गिरावट के साथ लाल निशान पर खुला।
3 अगस्त को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और भोपाल समेत देश के प्रमुख शहरों में 22 और 24 कैरेट गोल्ड तथा चांदी के ताजा रेट्स की पूरी जानकारी यहाँ देखें।
कारोबारी सप्ताह के पहले दिन आज भारतीय शेयर बाजार मजबूत बढ़त के साथ खुला। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के संकेतों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

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