रीवा के गांधी मेमोरियल अस्पताल की बर्न यूनिट में खराब एसी मरीजों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। डिप्टी सीएम के निर्देशों के बावजूद व्यवस्था नहीं सुधरी, जिससे झुलसे मरीज और उनके परिजन परेशान हैं।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
शारीरिक पीड़ा क्या होती है, इसे रीवा के श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध गांधी मेमोरियल अस्पताल के बर्न यूनिट में जाकर बखूबी समझा जा सकता है। लेकिन यहां दर्द सिर्फ आग की लपटों से नहीं मिला, बल्कि अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता उस दर्द में घी डालने का काम कर रही है। बर्न यूनिट में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीजों के हिस्से में इस वक्त राहत की ठंडी हवा नहीं, बल्कि सिस्टम की बेरुखी से उपजी यातना आ रही है।
जब डिप्टी सीएम का आदेश भी हो गया 'हवा'
अभी कुछ ही दिन पहले प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। जब पीड़ित परिजनों ने रो-रोकर उन्हें अपनी आपबीती सुनाई, तो डिप्टी सीएम खुद वार्ड का मुआयना करने पहुंचे। उन्होंने अपनी आंखों से देखा कि कैसे खराब एसी मरीजों पर जुल्म ढा रहे हैं। इस पर गहरी नाराजगी जताते हुए डिप्टी सीएम ने मौके पर ही मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को जमकर फटकार लगाई थी और तत्काल एसी दुरुस्त कराने के सख्त निर्देश दिए थे। आमतौर पर डिप्टी सीएम के सख्त तेवरों के बाद प्रशासन की सुस्ती गायब हो जाती है, लेकिन जीएमएच प्रबंधन के हौसले इतने बुलंद हैं कि दो दिन बीत जाने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। डीन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है और आदेश फाइलों या कहें कि कूड़ेदान की शोभा बढ़ा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या अस्पताल प्रबंधन किसी बड़े हादसे या किसी मरीज की जान जाने का इंतजार कर रहा है। अगर सूबे के उप मुख्यमंत्री के आदेशों की अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारी इस तरह धज्जियां उड़ाएंगे, तो आम जनता न्याय और राहत की उम्मीद किससे करे। फिलहाल गांधी मेमोरियल अस्पताल की बर्न यूनिट में भर्ती बेबस मरीज और उनके तीमारदार हर पल इस सिस्टम की संवेदनहीनता की आग में झुलसने को मजबूर हैं।
आग उगल रहे एसी, घर से पंखा लाने को मजबूर परिजन
अस्पताल के बर्न यूनिट में इस समय कई ऐसे मरीज जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं, जो 70 फीसदी तक झुलस चुके हैं। डॉक्टरों की मानें तो ऐसे मरीजों की चमड़ी पूरी तरह डैमेज हो जाती है, जिससे असहनीय जलन होती है। इस जलन से राहत देने के लिए वार्ड में चौबीसों घंटे एयर कंडीशनर का चलना अनिवार्य है, ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे। विडंबना देखिए कि अस्पताल के वार्डों में लगे एसी ठंडी हवा के बजाय आग उगल रहे हैं। झुलसे हुए मरीजों को राहत देने के बजाय ये खराब एसी उन्हें और तड़पा रहे हैं। स्थिति इतनी बदतर है कि कुछ बेबस परिजनों को अपने मरीजों की जान बचाने और उन्हें थोड़ी राहत देने के लिए अपने घरों से टेबल फैन लाकर लगाना पड़ रहा है।


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