बढ़ते हवाई किराए को लेकर सरकार ने एयरलाइंस को चेतावनी दी है। ATF की कीमतें दोगुनी होने के बाद इंडिगो और अन्य एयरलाइंस ने किराए में ₹10,000 तक की वृद्धि की है। जानें सरकार का अगला कदम।

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
देश में बढ़ते हवाई किराए ने आम आदमी की जेब पर भारी बोझ डाल दिया है, जिसे लेकर अब केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि एयरलाइंस ने मनमाने ढंग से किराए में बढ़ोतरी जारी रखी, तो सरकार को हस्तक्षेप करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए सरकार जल्द ही प्रमुख एयरलाइंस के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करने जा रही है।
विमानन कंपनियों का तर्क है कि हवाई ईंधन यानी ATF (Aviation Turbine Fuel) की कीमतों में पिछले कुछ समय में भारी उछाल आया है। आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं, जो किसी भी एयरलाइन की परिचालन लागत का 40% से अधिक हिस्सा होता है। इसी दबाव के कारण इंडिगो (IndiGo) जैसी प्रमुख एयरलाइंस ने अपनी चुनिंदा उड़ानों के किराए में ₹10,000 तक की बढ़ोतरी कर दी है।
आम यात्रियों की शिकायतों और सोशल मीडिया पर बढ़ते आक्रोश के बीच मंत्रालय ने कहा है कि "किराया निर्धारण की स्वतंत्रता का मतलब यात्रियों का शोषण नहीं है।"
बैठक का एजेंडा: सरकार एयरलाइंस से किराए की 'अपर कैपिंग' (अधिकतम सीमा) तय करने या पीक सीजन के दौरान कीमतों को नियंत्रित रखने का प्रस्ताव रख सकती है।
पारदर्शिता की मांग: एयरलाइंस को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किस आधार पर बेस फेयर से कई गुना अधिक किराया वसूला जा रहा है।
उपभोक्ता हितों की रक्षा: सरकार का मानना है कि हवाई चप्पल पहनने वाले को हवाई सफर कराने का सपना तभी पूरा होगा जब कीमतें नियंत्रण में रहेंगी।
फेस्टिवल सीजन और गर्मी की छुट्टियों से ठीक पहले किराए में इस वृद्धि ने यात्रियों की प्लानिंग बिगाड़ दी है। दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-बेंगलुरु जैसे व्यस्त रूट्स पर अचानक बढ़ा किराया न केवल पर्यटन बल्कि आपातकालीन यात्रा करने वालों के लिए भी बड़ी मुसीबत बन गया है। अब सबकी नजरें मंत्रालय और एयरलाइंस के बीच होने वाली आगामी मीटिंग पर टिकी हैं।

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आज भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रहा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान पर कारोबार करते दिखे। तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार को बड़ा सहारा दिया। ईरान ने ओमान के साथ हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन पर बातचीत फिर से शुरू की है।
आज भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर खुले। अमेरिका द्वारा ईरान पर कड़े द्वितीयक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद कच्चे तेल के दाम स्थिर रहे। हालांकि, पिछले कारोबारी सत्र में तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई थी।
त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी की बेलगाम होती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कच्ची चीनी के आयात नियमों में संशोधन करते हुए आयातकों के लिए 2 महीने के भीतर रिफाइनिंग और बिक्री को अनिवार्य कर दिया है।
आज सोना महंगा हुआ है तो वहीं, चांदी के रेट गिर ही गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज के अनुसार, 24 कैरेट सोने का वायदा भाव शुरुआती कारोबार में 0.67 फीसदी बढ़कर यानी 1087 रुपए तेजी के साथ 1,63,525 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है।
आज हफ्ते का पहला दिन है और सावन का आखिरी सोमवार भी है। इस दौरान शेयर बाजार में भी जबरदस्त हरियाली छाई हुई है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही हरे निशान पर कारोबार कर रहे हैं। सेंसेक्स में कारोबार की शुरुआत 88 अंकों की बढ़त के साथ हुई। वहीं, निफ्टी 33 अंक उछलकर 24000 के पार चल गया।
केंद्र सरकार ने नियमों का पालन न करने पर कई प्रमुख फूड ब्रांड्स और रिटेल चेन के खिलाफ हाल के महीनों में करीब 150 नोटिस जारी किए हैं। भारत की खाद्य सुरक्षा नियामक संस्था एफएसएसएआई ने ये नोटिस भ्रामक विज्ञापनों, झूठे दावों और लेबल से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने पर दिए हैं।
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भारतीय शेयर बार में आज गिरावट का रुख रहा। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 50 अंक से अधिक लुढ़क गया। वहीं, निफ्टी भी 24,250 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया। यह गिरावट वॉल स्ट्रीट में रात भर के नुकसान और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण हुई।
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