भोपाल के सप्रे संग्रहालय में 'पुरखों को प्रणाम' पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने युवा पीढ़ी से हिन्दी पत्रकारिता के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया और उनकी जीवनी 'पीर पराई जाने रे' का लोकार्पण हुआ।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने युवा पीढ़ी का आह्वान किया है कि वे हिन्दी पत्रकारिता के समृद्ध और आदर्शवादी इतिहास से प्रेरणा लें। उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का शुरुआती दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारे कर्मठ पत्रकारों ने ब्रिटिश हुकूमत के कड़े दमन और कठिनाइयों के बावजूद पत्रकारिता की शुचिता, आदर्शों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया।
राज्यपाल बुधवार को भोपाल स्थित माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान द्वारा आयोजित "हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव" के अंतर्गत "पुरखों को प्रणाम: पोस्टर प्रदर्शनी" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल श्री पटेल के जीवन पर आधारित जीवनी का लोकार्पण भी किया गया।
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने सप्रे संग्रहालय द्वारा आयोजित पोस्टर प्रदर्शनी का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने संस्थान की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐतिहासिक हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं और राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने वाले युग निर्माता संपादकों को याद करना एक अनुकरणीय कार्य है। यह प्रदर्शनी देश और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले महान पुरखों के त्याग और साधना को जीवंत करती है, जिससे दर्शकों के मन में उनके प्रति आदर का भाव पैदा होता है।
राज्यपाल ने रेखांकित किया कि पत्रकारिता को केवल एक साधारण व्यवसाय के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह समाज के प्रति गहरी जवाबदेही, सत्य के प्रति निष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का माध्यम है। हिन्दी पत्रकारिता ने अपने जन्मकाल से ही केवल समाचार देने का काम नहीं किया, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने, जनमत को सशक्त बनाने और नागरिकों में राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम किया है। स्वाधीनता आंदोलन के दौरान हिन्दी पत्रकारिता ने सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में अग्रिम भूमिका निभाई थी।
विज्ञान और तकनीक के आधुनिक युग पर बात करते हुए राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि आज भी हिन्दी पत्रकारिता भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने और नागरिक चेतना को जगाने में प्रभावी भूमिका निभा रही है। हालांकि, बदलते समय के साथ इसे वीडियो, पॉडकास्ट, वेबसाइट और मोबाइल प्लेटफॉर्म जैसे आधुनिक डिजिटल माध्यमों से जोड़ना अनिवार्य हो गया है ताकि युवा पीढ़ी तक इसकी पहुंच बढ़े। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों से अपील की कि वे युवाओं में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, निष्पक्षता, नवाचार और सामाजिक संवेदनशीलता के संस्कार विकसित करें।
इस विशेष अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के प्रेरक जीवन और जन-कल्याणकारी कार्यों पर आधारित पुस्तक "पीर पराई जाने रे" का विमोचन किया गया। इस जीवनी का लेखन लोकभवन की कंट्रोलर श्रीमती शिल्पी दिवाकर ने किया है, जबकि इसका मुद्रण और प्रकाशन माधवराव सप्रे संग्रहालय द्वारा किया गया है। राज्यपाल ने इस जीवनी के लेखन और प्रकाशन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय ने भारत की प्राचीन ज्ञान और पत्रकारिता परंपरा की सराहना की। वहीं, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने देश की समृद्ध सांस्कृतिक पत्रकारिता का जिक्र करते हुए एक बेहद दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत के पात्र 'संजय' को दुनिया का पहला लाइव ब्रॉडकास्टर या सीधा प्रसारण करने वाला माना जा सकता है, जिन्होंने धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाया था। इसी तरह देवर्षि नारद ने लोक-कल्याण के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान की शुरुआत की थी, जिसे आज के पत्रकार आगे बढ़ा रहे हैं।
समारोह के दौरान सप्रे संग्रहालय के संस्थापक विजयदत्त श्रीधर ने राज्यपाल को पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया। साथ ही, हिन्दी भवन द्वारा हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने पर प्रकाशित एक विशेष विशेषांक भी राज्यपाल को भेंट किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और व्यावसायिकता की चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल बोले- हिन्दी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लें युवा

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