ईरान ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची के पाकिस्तान दौरे और अमेरिका के साथ गुप्त वार्ता की खबरों को सिरे से नकारा। जानें क्यों ईरान ने लेबनान में सीजफायर होने तक बातचीत से इनकार किया है।

तेहरान। स्टार समाचार वेब
मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने उन अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स को कड़ाई से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान के वरिष्ठ अधिकारी अमेरिका के साथ 'बैक-चैनल' बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचे हैं। ईरानी समाचार एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष (स्पीकर) बागेर गालिबफ ने देश नहीं छोड़ा है।
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी तसनीम और प्रेस टीवी ने साझा बयान में कहा कि विदेश मंत्री अराघची और बागेर गालिबफ वर्तमान में तेहरान में ही मौजूद हैं। वे अपने नियमित राष्ट्रीय कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं और पाकिस्तान जाने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं। इससे पहले कुछ विदेशी मीडिया संस्थानों, विशेषकर 'वॉल स्ट्रीट जर्नल', ने यह दावा किया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल वॉशिंगटन के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद जा सकता है।
ईरानी सूत्रों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता तब तक संभव नहीं है जब तक कि क्षेत्रीय परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं। ईरान ने वार्ता के लिए दो प्रमुख शर्तें रखी हैं:
लेबनान में इजरायली हमले: ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान पर इजरायल के हमले पूरी तरह बंद नहीं हो जाते, बातचीत का सवाल ही नहीं उठता।
सीजफायर की प्रतिबद्धता: अमेरिका को क्षेत्र में संघर्ष-विराम (Ceasefire) के प्रति अपनी गंभीरता और प्रतिबद्धता साबित करनी होगी।
"मीडिया में चल रही यह खबर कि ईरानी वार्ताकार दल इस्लामाबाद पहुंच गया है, पूरी तरह गलत है। जब तक लेबनान में शांति स्थापित नहीं होती, ईरान की ऐसी किसी भी प्रक्रिया में शामिल होने की कोई योजना नहीं है।"
- तसनीम न्यूज (आधिकारिक सूत्र)
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट को 'मनगढ़ंत' करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम पैदा करने के लिए फैलाई जा रही हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता वर्तमान में लेबनान और गाजा में जारी संघर्ष को रुकवाना है, न कि पर्दे के पीछे कोई गुप्त समझौता करना।

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