भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान में सैन्य दखल के बजाय आंतरिक राजनीतिक सुधार और जनता के दबाव के जरिए सत्ता परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं।
By: Ajay Tiwari
Mar 16, 20264:16 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने एक बड़ा और रणनीतिक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल या अमेरिका का ईरान पर पूर्ण सैन्य हमला करने या उसकी जमीन पर कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है। राजदूत के अनुसार, उनका मुख्य उद्देश्य ईरान की आंतरिक नीतियों में सुधार लाना है, जिसका नेतृत्व वहां की जनता के हाथों में होना चाहिए।
रूवेन अजार ने कहा कि इजरायल और अमेरिका का मानना है कि ईरान में बदलाव बाहर से थोपे गए युद्ध के बजाय अंदरूनी जनाक्रोश और सुधारों के जरिए आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि ईरान की जनता अपनी सरकार की वर्तमान नीतियों से संतुष्ट नहीं है, तो वे नेतृत्व में बदलाव के लिए अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं। अजार के मुताबिक, स्थानीय नागरिकों के जरिए आने वाला बदलाव न केवल प्रभावी होगा, बल्कि लंबे समय तक क्षेत्र में शांति बनाए रखेगा।
राजदूत ने अपने बयान में इस बात पर विशेष बल दिया कि एक 'स्थिर और शांत' पश्चिम एशिया पूरी दुनिया के हित में है। उन्होंने कहा कि ईरान की वर्तमान नीतियां न केवल इजरायल बल्कि खाड़ी देशों और वैश्विक व्यापारिक रास्तों के लिए भी खतरा पैदा कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी यही मानना है कि क्षेत्र को उन खतरों से मुक्त किया जाए जो ईरान समर्थित हथियारबंद समूहों और उसके मिसाइल प्रोग्राम के कारण उत्पन्न हो रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल-ईरान के बीच मिसाइल हमलों और साइबर वार का दौर चल रहा है। जहां एक ओर ईरान अपने कार्यक्रमों को आत्मरक्षा बताता है, वहीं इजरायल उसे क्षेत्रीय अशांति का मुख्य कारण मानता है। राजदूत अजार के इस बयान को 'सॉफ्ट पावर' और कूटनीतिक दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इजरायल फिलहाल सीधे युद्ध के बजाय ईरान के भीतर राजनीतिक अस्थिरता और जन-दबाव की उम्मीद कर रहा है।