इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को इस्तीफा भेजा। दिल्ली आवास पर आग के दौरान मिले थे 500 के नोटों के बंडल। जानें महाभियोग और जांच की पूरी कहानी।

प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को भेज दिया है। जस्टिस वर्मा पिछले कुछ समय से भारी विवादों में घिरे थे, जिसकी शुरुआत उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर लगी आग और वहां से मिले करोड़ों रुपये के जले हुए नोटों से हुई थी।
जस्टिस वर्मा के इस्तीफे की प्रति 'बार एंड बेंच' द्वारा सार्वजनिक की गई है, जिस पर 9 अप्रैल की तारीख अंकित है। हालांकि, इसकी जानकारी 10 अप्रैल को सामने आई। अपने पत्र में उन्होंने लिखा-
यह पूरा मामला 14 मार्च 2025 का है, जब जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में पदस्थ थे। उनके सरकारी बंगले में अचानक आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकल कर्मियों के होश तब उड़ गए जब उन्हें वहां 500-500 के नोटों के बंडलों से भरी बोरियां मिलीं। इस घटना के बाद हड़कंप मच गया और जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली से इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया।
जस्टिस वर्मा ने 5 अप्रैल 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में शपथ तो ली, लेकिन उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी होने तक उन्हें अदालती कार्यवाही से दूर रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने 22 मार्च को इस मामले की आंतरिक जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति ने 4 मई को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें जस्टिस वर्मा को आरोपों का दोषी पाया गया। इसके बाद उन पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी।
लोकसभा में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, जिसे जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि जब राज्यसभा ने प्रस्ताव मंजूर नहीं किया, तो लोकसभा जांच समिति कैसे बना सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'जजेज इंक्वायरी एक्ट' के तहत लोकसभा स्पीकर के पास भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति बनाने का पूर्ण अधिकार है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल तिवारी के अनुसार, इस्तीफे के बाद फिलहाल विभागीय या संवैधानिक कार्रवाई रुक सकती है, लेकिन मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। यदि केंद्र सरकार चाहे, तो इस मामले में नए सिरे से FIR दर्ज कर आपराधिक जांच को आगे बढ़ा सकती है।

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