मैहर सिविल अस्पताल में लिफ्ट और ऑक्सीजन प्लांट एक माह बाद भी बंद हैं। डिप्टी सीएम के निर्देशों के बावजूद सुधार नहीं हुआ, मरीजों को सिलेंडर के भरोसे इलाज मिल रहा है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के आदेश के बाद भी मैहर सिविल अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर नहीं आई। यहां अभी भी मरीजों के सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्ट और ऑक्सीजन प्लांट बंद पड़े हुए हैं। इन व्यवस्थाओं को अभी तक सुधारा नहीं गया। यहां भर्ती गंभीर मरीजों की जान अब भी आॅक्सीजन सिलेंडर के भरोसे ही है। गौरतलब है कि विगत माह 19 फरवरी को श्री शुक्ल द्वारा मैहर सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया गया था जिस दौरान लिफ्ट और ऑक्सीजन प्लान बंद मिले थे। इस अव्यवस्था पर उपमुख्यमंत्री द्वारा नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को समयसीमा में सुधार के निर्देश दिए थे।
जिम्मेदारों ने दिलाया था भरोसा
जानकारों ने बताया कि उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि अस्पताल की लिफ्ट एक सप्ताह के भीतर चालू की जाए ताकि मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके। वहीं बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट को दो दिनों के भीतर चालू कर आॅक्सीजन सप्लाई नियमित करने का भी आदेश दिया गया था।
निरीक्षण के समय मैहर विधायक श्रीकांत चतुवेर्दी, सांसद प्रतिनिधि संतोष सोनी, जिला कलेक्टर रानी बाटड, एसडीएम दिव्या पाठक सहित प्रशासनिक अधिकारी और अस्पताल स्टाफ मौजूद थे। उस समय अधिकारियों ने जल्द व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का भरोसा भी दिलाया था। लेकिन हकीकत यह है कि महीनों बीत जाने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को आज भी बंद लिफ्ट की वजह से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं ऑक्सीजन प्लांट चालू न होने से अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या उपमुख्यमंत्री के निर्देशों की भी प्रशासन में कोई अहमियत नहीं रही? अगर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं सुधरतीं, तो यह सीधे तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
दो-दो ऑक्सीजन प्लांट फिर भी किराए की सांस
कोरोना काल में जनभागीदारी से करीब 50 लाख की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया था। उसके बाद शासकीय स्वास्थ्य विभाग ने दूसरा प्लांट भी स्थापित किया, लेकिन वर्तमान की स्थिति में दोनों प्लांट सालों से बंद पड़े धूल खा रहे हैं। आखिरकार जब प्लांट बंद ही रखने थे, तो जनता के पैसे से यह दिखावा क्यों किया गया? यहां भर्ती मरीजों का इलाज किराए की ऑक्सीजन सिलेंडरों से हो रहा है, यह सिस्टम की नाकामी नहीं तो और क्या है? मैहर सिविल अस्पताल के प्रभारी डॉ. आरएन पाण्डेय ने बताया था कि अस्पताल की लिफ्ट तकनीकी कारणों से चार साल से बंद है। जबकि ट्रांसफार्मर खराब होने के चलते रनिंग आक्सीजन प्लांट बंद पड़ा हुआ है। प्लांट चलाने के लिए 220 केवीए का लोड चाहिए जो कि वर्तमान में लगा ट्रांसफार्मर नहीं दे पा रहा है। जैसे ही प्लांट चालू करते हैं अस्पताल की बिजली बंद हो जाती है।


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