सतना के परसमनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, स्टाफ, जनरेटर और संसाधनों की कमी से ग्रामीण परेशान हैं। बारिश में खराब रास्ता गंभीर मरीजों के लिए जोखिम बढ़ाता है, 85 गांव प्रभावित हैं।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल को लेकर मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।
नागौद से गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाई गई प्रसूता की उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने समय पर आवश्यक चिकित्सकीय प्रयास किए जाने का दावा किया।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ईसीजी रिपोर्ट प्रिंट करने के लिए कागज खत्म हो गया। मरीजों को मोबाइल में फोटो लेकर डॉक्टरों को रिपोर्ट दिखानी पड़ी, जबकि कई ग्रामीण और बुजुर्गों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
सतना जिला अस्पताल की जांच रिपोर्ट में विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और संसाधनों की कमी स्वीकार की गई। 150 प्रतिशत बेड ऑक्यूपेंसी के कारण मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं।
सतना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल गई। मैहर से रेफर गर्भवती महिला को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिली, जिससे उसे पैदल लेबर रूम तक जाना पड़ा। वार्ड बॉय की अनुपस्थिति भी उजागर हुई।
सतना में आग से झुलसे मरीजों को बिना एसी वाली 108 एंबुलेंस से रेफर किए जाने के बाद आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। एंबुलेंसों के रखरखाव और मॉनिटरिंग की कमी भी सामने आई है।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और निजी प्रैक्टिस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मरीजों को ओपीडी, बेड और जांच सुविधाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सीधी जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व या प्रसव बाद मौत दर्ज हुई। चिंताजनक आंकड़ों ने स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय संसाधनों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदेश की नि:शुल्क शव वाहन सेवा से हजारों परिवारों को राहत मिली है, लेकिन रीवा में 9 महीनों में 1,129 मौतों के आंकड़े ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली और इलाज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






















