सतना के परसमनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, स्टाफ, जनरेटर और संसाधनों की कमी से ग्रामीण परेशान हैं। बारिश में खराब रास्ता गंभीर मरीजों के लिए जोखिम बढ़ाता है, 85 गांव प्रभावित हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
नागौद विधानसभा क्षेत्र और उचेहरा तहसील के आदिवासी बाहुल्य पहाड़ी अंचल में अस्पताल ग्रामीणों के लिए सिर्फ इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में जिंदगी की आखिरी उम्मीद है। लेकिन ग्राम पंचायत परसमनिया का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही बदहाल व्यवस्थाओं से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि गंभीर मरीज को बेहतर उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने से लेकर जरूरी सुविधाएं मिलने तक संघर्ष करना पड़ रहा है।
बारिश के दिनों में यहां से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने वाला रास्ता गहरे गड्ढों और उनमें भरे पानी के कारण जोखिम भरा हो जाता है। दूसरी ओर अस्पताल में डॉक्टर और जरूरी स्टाफ की कमी, वर्षों से बंद पड़ा जनरेटर, टूटे पलंग, मरीजों और प्रसूताओं को डाइट नहीं मिलने की शिकायत तथा जर्जर होता भवन स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी तस्वीर सामने ला रहे हैं।
बारिश में गड्ढों से भरा रास्ता
परसमनिया प्राथमिक स्वास्थ केंद्र से उचेहरा सामुदायिक स्वास्थ केंद्र तक जाने वाला मार्ग बारिश में और मुश्किल हो जाता है। जगह-जगह बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा लगाना कठिन होता है। ऐसे में गंभीर मरीज, घायल व्यक्ति या प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को तत्काल सीएचसी पहुंचाना चुनौती बन जाता है।
एएनएम संभालती हैं मोर्चा
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से स्टाफ की कमी की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार ड्यूटी डॉक्टर की अनुपस्थिति में प्राथमिक उपचार, ड्रेसिंग से लेकर प्रसव तक की जिम्मेदारी एएनएम को संभालनी पड़ती है। दूरस्थ और पहाड़ी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से यह स्थिति गंभीर है। खासकर प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में प्रशिक्षित और पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता जरूरी है। इसके अलावा जरूरत के समय प्रसव वाहन उपलब्ध नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। यहां के भवन का लोकार्पण वर्ष 2003 में हुआ था। दो दशक से अधिक समय बीतने के बाद भवन अब कई जगह से जर्जर होने लगा है और दीवारों में दरारें दिखाई देने लगी हैं।
10 साल से जनरेटर बना शोपीस
पहाड़ी अंचल होने के कारण यहां बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं रहने की बात ग्रामीण बताते हैं। पीएचसी में बिजली गुल होने की स्थिति से निपटने के लिए जनरेटर मौजूद है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक करीब 10 वर्षों से यह बंद पड़ा है। रात में बिजली गुल होने की स्थिति में प्रसव, ड्रेसिंग और भर्ती मरीजों के उपचार जैसी जरूरी सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। यहां भर्ती मरीजों के लिए उपलब्ध पलंगों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों के अनुसार कई पलंग टूटे पड़े हैं। इसके अलावा भर्ती मरीजों और जननी-प्रसूता महिलाओं को निर्धारित डाइट नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई है।
16 पंचायतों के 85 गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था का जिम्मा
परसमनिया पीएचसी की जिम्मेदारी छोटी नहीं है। उचेहरा जनपद क्षेत्र की करीब 16 पंचायतों के 85 गांवों के ग्रामीण इलाज के लिए इस स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर हैं। इतनी बड़ी आबादी के लिए डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, दवाइयां, प्रसव सुविधा, आपातकालीन सेवाएं, भर्ती मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं और परिवहन व्यवस्था पर्याप्त होना आवश्यक है। लेकिन मौजूदा शिकायतें बताती हैं कि स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है।
अस्पताल नाम की बनी हुई है, यहां कोई साधन नहीं हैं। मजबूरी में इलाज के लिए उचेहरा जाना पड़ता है।
राजेश सिंगरौल, ग्रामीण
समय पर कोई स्टाफ उपस्थित नहीं रहता। कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
सुंदरलाल, ग्रामीण
तीन वर्ष से फार्मासिस्ट का पद खाली है। यहां एक एएनएम है और कुछ दिन पहले एक नर्सिंग कर्मचारी की नियुक्ति हुई है। साधन की कमी होने पर 108 से मरीज को उचेहरा भेजा जाता है और उचेहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित प्रसव कराया जाता है।
डॉ. ए.के. राय, विकासखंड चिकित्सा अधिकारी


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