मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका। अनुच्छेद 329 का हवाला देकर SC ने नामांकन रद्द करने के खिलाफ याचिका खारिज की। मध्य प्रदेश से बीजेपी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीते।

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव (MP Rajya Sabha Election) को लेकर कांग्रेस को देश की सबसे बड़ी अदालत से करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपना नामांकन रद्द (Nomination Cancelled) किए जाने को चुनौती दी थी।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस ए एस चंदुरकर की बेंच ने कहा कि यदि इस चरण में याचिका पर सुनवाई की जाती है, तो यह संविधान के दायरे से बाहर होगा। कोर्ट के इस रुख के बाद मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो गया है।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रियाओं के बीच में अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। जानिए क्या कहा-
अनुच्छेद 329 (Article 329) का हवाला: संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत यह व्यवस्था है कि चुनावी मामलों के अंतरिम चरण में अदालतें दखल नहीं देती हैं।
हाईकोर्ट जाने का विकल्प: संविधान में इकलौती व्यवस्था यह दी गई है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद यदि कोई उम्मीदवार असंतुष्ट है, तो वह संबंधित हाईकोर्ट में चुनाव याचिका (Election Petition) दाखिल कर सकता है।
गलत परंपरा की शुरुआत: बेंच ने टिप्पणी की कि अगर इस याचिका को स्वीकार किया जाता है, तो यह एक नई और गलत परंपरा की शुरुआत होगी कि नामांकन खारिज होने पर लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट आने लगेंगे।
कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र (Nomination Paper) रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा इसलिए खारिज कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने तेलंगाना की एक अदालत में लंबित अपने एक आपराधिक मामले की जानकारी हलफनामे में नहीं दी थी।
चार्ज फ्रेम नहीं हुए: कोर्ट में नटराजन की तरफ से पेश हुए देश के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट (RPA) के सेक्शन 33ए के तहत सिर्फ उसी केस की जानकारी देना अनिवार्य है, जिसमें कोर्ट द्वारा आरोप तय (Charges Framed) हो चुके हों। मीनाक्षी नटराजन के मामले में सिर्फ नोटिस/समन आया है, कोई चार्ज फ्रेम नहीं हुआ है।
मामले से कोई सीधा संबंध नहीं: सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि तेलंगाना का यह मामला साल 2022 का है, जिसमें शिकायतकर्ता ने पार्टी द्वारा कार्रवाई न किए जाने का आरोप लगाया है। जबकि मीनाक्षी नटराजन तो साल 2025 में उस राज्य की पार्टी प्रभारी बनी हैं। ऐसे में इसे छुपाने का सवाल ही नहीं उठता।
BNSS की धारा 223 का हवाला: सिंघवी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 का हवाला देते हुए कहा कि नए कानून के तहत संज्ञान लेने से पहले आरोपी का पक्ष सुना जाना चाहिए।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी: सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने सिंघवी से कहा, "हमें सुप्रीम कोर्ट का कोई ऐसा पुराना फैसला दिखाइए जहां कोर्ट ने चुनाव के बीच में नामांकन खारिज होने पर दखल दिया हो।" इस पर सिंघवी ने कहा कि इस मामले का फैसला इसके विशेष तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
मीनाक्षी नटराजन ने बुधवार (10 जून, 2026) देर रात सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने याचिका में मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित किए जाने पर रोक लगाने की भी मांग की थी, जिसे कोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दिया। गुरुवार को मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए नाम वापसी का आखिरी दिन था। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पहले ही रद्द हो चुका था, जिसके कारण मैदान में सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन उम्मीदवार ही बचे थे। नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होते ही रिटर्निंग ऑफिसर ने तीनों बीजेपी उम्मीदवारों को निर्विरोध (Unopposed) विजेता घोषित कर दिया।
मीनाक्षी नटराजन की प्रतिक्रिया
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