भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट! डॉलर के मुकाबले पहली बार रुपया 95 के पार पहुँचा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती से शेयर बाजार भी टूटा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
भारतीय मुद्रा (INR) के लिए आज का दिन बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। सोमवार को करेंसी मार्केट में उस वक्त हड़कंप मच गया जब रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 95.58 पर जा गिरा। यह इतिहास में पहली बार है जब रुपये ने 95 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया है।
दिलचस्प बात यह है कि सोमवार सुबह बाजार खुलने पर रुपये में मजबूती देखी गई थी और यह 128 पैसे की बढ़त के साथ 93.57 के स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, दोपहर होते-होते बाजार की चाल पूरी तरह बदल गई। अपने दिन के उच्चतम स्तर से रुपया 2.33 रुपये टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 12 रुपये की भारी गिरावट आ चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में इस गिरावट के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:
डॉलर इंडेक्स में मजबूती: वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स 100 के ऊपर बना हुआ है, जिससे अन्य मुद्राओं पर दबाव है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115.50 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना भी एक बड़ी वजह है।
रुपये की कमजोरी का सीधा असर शेयर बाजार पर भी दिखा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1,733 अंक गिरकर 71,849 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 528 अंकों की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां नहीं सुधरीं, तो आने वाले दिनों में रुपये में और भी गिरावट देखने को मिल सकती है।

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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84 फीसदी गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था।
देशभर के बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इस सप्ताह सभी बैंक आम दिनों की तरह खुले रहेंगे और कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को टालने का फैसला किया है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह गिरे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार पर हावी रहीं। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
गर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। आज रविवार को भले ही बैंक की शाखाएं खुली हुई हैं और कामकाज चल रहा है, लेकिन आने वाले हफ्ते में बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहने वाली हैं। आम ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और करोड़ों रुपए का वित्तीय लेनदेन अटकने की संभावना है।
वैश्विक चिंताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में 0.88 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।