30 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट। हूती विद्रोहियों के इजरायल पर हमले और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल से निवेशकों के 5 लाख करोड़ रुपये डूबे। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें
By: Ajay Tiwari
Mar 30, 202611:27 AM
बिजनेस डेस्क। स्टार समाचार वेब
सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए 'ब्लैक मंडे' साबित हुई। एशियाई बाजारों में मची खलबली का असर घरेलू बाजार पर साफ देखा गया, जहाँ खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के तनाव ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया है।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सेंसेक्स 1018 अंक (1.4%) की गिरावट के साथ 72,565 के स्तर पर खुला। वहीं, निफ्टी 50 भी अछूता नहीं रहा और 270 अंकों (1.2%) की फिसलन के साथ 22,549.65 के स्तर पर कारोबार शुरू किया। देखते ही देखते सेंसेक्स की गिरावट 1100 अंकों तक पहुँच गई और निफ्टी 22,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया।
बाजार में इस क्रैश की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में युद्ध का विस्तार होना है। हूती विद्रोहियों द्वारा इजरायल पर किए गए हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों ने वैश्विक तनाव बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर एशियाई बाजारों पर पड़ा:
जापान का निक्केई (Nikkei): लगभग 5% की भारी गिरावट।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi): 4% तक टूटा।
बाजार खुलने के महज कुछ ही मिनटों में निवेशकों की भारी संपत्ति स्वाहा हो गई। BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) का मार्केट कैपिटलाइजेशन, जो शुक्रवार को 422 लाख करोड़ रुपये था, वह आज सुबह गिरकर 417 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इस तरह निवेशकों को सीधे तौर पर 5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
गिरावट का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर दिखा:
एक्सिस बैंक: 3.63% की गिरावट।
कोटक महिंद्रा बैंक: 3.47% की कमजोरी।
बजाज फिनसर्व और बजाज फाइनेंस: लगभग 2% की गिरावट।
ट्रेंट (Trent): 2.08% नीचे।
इसके विपरीत, BEL, रिलायंस इंडस्ट्रीज, NTPC और पावर ग्रिड जैसे कुछ गिने-चुने शेयर मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में संघर्ष करते नजर आए।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट डॉ. वीके विजय कुमार के अनुसार, पश्चिम एशिया का संघर्ष अब और गंभीर रूप ले चुका है। हूती विद्रोहियों की सक्रियता और अमेरिका की सैन्य भागीदारी ने अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है, जहाँ ब्रेंट क्रूड $116 प्रति बैरल के स्तर को छू चुका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए चिंता का विषय है।