NSO के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 8% की मजबूत GDP वृद्धि दर्ज की। विनिर्माण (9.1%), कंस्ट्रक्शन (7.2%), और वित्त व रियल एस्टेट (10.2%) ने नेतृत्व किया, जबकि कृषि क्षेत्र धीमा रहा।

बिजनेस डेस्क. नई दिल्ली
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था ने जुलाई-सितंबर तिमाही में मजबूत 8% की जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की है। इस प्रभावशाली वृद्धि का नेतृत्व मुख्य रूप से विनिर्माण (Manufacturing), बुनियादी ढांचा (Infrastructure) और सशक्त सेवा क्षेत्रों ने किया है। स्थिर मूल्यों पर जीडीपी 48.63 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 44.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। नॉमिनल (साधारण) जीडीपी 8.7\% बढ़कर 85.25 लाख करोड़ रुपये हो गई है।
डेटा से पता चलता है कि विनिर्माण क्षेत्र में 9.1\% निर्माण (Construction) में 7.2\% और व्यापक माध्यमिक (Secondary) क्षेत्रों में 8.1\% की वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय अर्थव्यवस्था का सेवा क्षेत्र सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला रहा, जिसमें तृतीयक क्षेत्र ने 9.2\% की वृद्धि दर्ज की। इस वृद्धि को विशेष रूप से वित्त, रियल एस्टेट और अन्य व्यावसायिक सेवाओं में 10.2\% की मजबूत वृद्धि से बल मिला।
निजी उपभोग (Private Consumption) में भी अच्छी तेजी देखने को मिली है; रियल प्राइवेट फाइनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PFCE) 7.9\% की दर से बढ़ा, जो पिछले वर्ष के 6.4\% से अधिक है और यह असामान्य मानसून के बावजूद स्थिर मांग को दर्शाता है। हालांकि, कृषि क्षेत्र 3.5\% की कम वृद्धि के साथ कुछ पीछे रहा, जबकि बिजली, गैस और जल आपूर्ति जैसी उपयोगिताओं में भी सिर्फ 4.4\% की वृद्धि दर्ज की गई।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8\% रही, जो पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही के 6.1\% से काफी अधिक है। इस तिमाही में वास्तविक जीवीए (GVA) वृद्धि 8.1\% रही, जिसे प्रमुख उद्योगों में व्यापक विस्तार का समर्थन मिला है।

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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84 फीसदी गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था।
देशभर के बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इस सप्ताह सभी बैंक आम दिनों की तरह खुले रहेंगे और कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को टालने का फैसला किया है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह गिरे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार पर हावी रहीं। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
गर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। आज रविवार को भले ही बैंक की शाखाएं खुली हुई हैं और कामकाज चल रहा है, लेकिन आने वाले हफ्ते में बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहने वाली हैं। आम ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और करोड़ों रुपए का वित्तीय लेनदेन अटकने की संभावना है।
वैश्विक चिंताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी में 0.88 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।