पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में अमेरिका के साथ रिश्तों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आतंकवाद, सैन्य तानाशाही और 9/11 के बाद की गलतियों को देश की बदहाली का कारण बताया

पाकिस्तान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ
इस्लामाबाद। स्टार समाचार वेब
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद में एक बेहद तीखा और आत्मनिरीक्षण से भरा बयान देते हुए अमेरिका के साथ पाकिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका ने हमेशा अपने निजी हितों के लिए पाकिस्तान का उपयोग किया और काम निकल जाने के बाद उसे 'टॉयलेट पेपर' की तरह फेंक दिया। आसिफ ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने इतिहास से कभी सबक नहीं सीखा और अल्पकालिक फायदों के लिए महाशक्तियों की ओर झुकता रहा, जिसका खामियाजा देश आज भी भुगत रहा है।
रक्षा मंत्री ने अफगानिस्तान में लड़ी गई दो प्रमुख जंगों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें मजहब और इस्लाम के नाम पर हिस्सा तो लिया गया, लेकिन असल में यह दो सैन्य तानाशाहों—जिया-उल-हक और परवेज मुशर्रफ—की निजी सत्ता को वैश्विक समर्थन दिलाने की कोशिश थी। उन्होंने 1979 के सोवियत हस्तक्षेप का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका ने एक विशेष नरेटिव तैयार कर पाकिस्तान को इस युद्ध में धकेला। वहीं, 11 सितंबर 2001 (9/11) के बाद अमेरिका के साथ खड़ा होना पाकिस्तान की एक बड़ी भूल थी, जिसकी कीमत देश आज बढ़ते आतंकवाद के रूप में चुका रहा है।
ख्वाजा आसिफ ने यह स्वीकार करने में संकोच नहीं किया कि पाकिस्तान का इतिहास आतंकवाद से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि आज पाकिस्तान जिस आतंक की आग में झुलस रहा है, वह पिछले डिक्टेटरों की गलतियों का ही नतीजा है। उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि इन युद्धों को जायज ठहराने के लिए पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली (Education System) में जानबूझकर बदलाव किए गए, जो जहर आज भी सिस्टम में मौजूद है।
आसिफ ने साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पाकिस्तान यात्रा का उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान की अहमियत कितनी कम थी। क्लिंटन भारत के लंबे दौरे के बाद मात्र कुछ घंटों के लिए इस्लामाबाद रुके थे, जो यह दर्शाता था कि दोनों देशों का रिश्ता केवल जरूरतों तक सीमित था। गौरतलब है कि उस समय जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ का तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली थी और देश में कोई निर्वाचित प्रधानमंत्री नहीं था। ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी कि आज विदेशी ताकतों का प्रभाव पाकिस्तान पर 30-40 साल पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है।

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