प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा करेंगे। जानें ईंधन सुरक्षा, तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर क्या है सरकार की योजना।
By: Ajay Tiwari
Mar 26, 20264:19 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करने जा रहे हैं। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के भारतीय राज्यों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का आकलन करना और उनसे निपटने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना है। प्रधानमंत्री का जोर 'टीम इंडिया' की भावना को मजबूत करने पर है, ताकि केंद्र और राज्य मिलकर किसी भी आपात स्थिति में एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल बिठा सकें।
इस उच्चस्तरीय बैठक का एक बड़ा हिस्सा भारत की ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर केंद्रित होगा। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रधानमंत्री राज्यों के साथ इस बात पर चर्चा करेंगे कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं या सप्लाई कम होती है, तो घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, समुद्री व्यापार मार्गों (Sea Routes) में आने वाली बाधाओं और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध सप्लाई चेन बनाए रखने के रोडमैप पर भी मंथन किया जाएगा।
मुख्यमंत्रियों के साथ इस बैठक से पहले केंद्र सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) भी आयोजित की थी, जिसमें सभी राजनीतिक दलों ने एकजुटता दिखाई। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने जानकारी दी कि सरकार ने विपक्ष के सभी संशयों और सवालों का विस्तार से जवाब दिया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाली पेट्रोलियम और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं जताई गई थीं। सरकार ने आश्वस्त किया है कि भारत स्थिति पर नजर बनाए हुए है और हाल ही में चार महत्वपूर्ण जहाजों को सुरक्षित लाने में सफल रहा है, जिससे वर्तमान में आपूर्ति स्थिर बनी हुई है।
सरकार का मानना है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय संकट के समय में राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने सरकार की सक्रियता की सराहना की और संकट की इस घड़ी में साथ खड़े होने का भरोसा दिलाया। कल होने वाली मुख्यमंत्रियों की बैठक इसी सिलसिले की अगली कड़ी है, ताकि आपदा प्रबंधन, ऊर्जा बचत और महंगाई नियंत्रण जैसे मुद्दों पर जमीनी स्तर (राज्यों) पर तैयारी पूरी रहे।