सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक के पीएम श्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भटनवारा में प्राचार्य और शिक्षकों की सोते हुए तस्वीरें वायरल होने से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। यह कोई पहला मामला नहीं है — पिछले महीनों में कई शिक्षकों के नींद में डूबे वीडियो सामने आ चुके हैं। शिक्षा विभाग की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी कंचन श्रीवास्तव ने जांच के आदेश देने की बात कही है। अब देखना यह है कि क्या विभाग नींद से जागेगा या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में जाएगा।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
लगता है शिक्षा विभाग इन दिनों ‘कुम्भकर्णी नींद’ में डूबा हुआ है। बीते कुछ महीनों में जिले के विभिन्न विद्यालयों से शिक्षकों के सोते हुए वीडियो और तस्वीरें वायरल होना अब आम बात बन चुकी है। विभाग ने पूर्व में ऐसे कुछ शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की लेकिन उसका कोई असर विभाग में नहीं दिख रहा है। कभी कोई अध्यापक स्कूल समय में मुंह ढंककर सपनों की दुनिया में खो जाता है, तो कहीं प्राचार्य महोदय ही झपकी लेने के नए रिकॉर्ड बनाते नजर आते हैं। ताजा मामला उचेहरा ब्लॉक के पीएम श्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भटनवारा का है जहां प्राचार्य ही खर्राटे मारते देखे गए। पीएम श्री विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता पर तो वहां अध्ययनरत छात्र ही प्रकाश डाल सकते हैं लेकिन यहां नींद का प्रभाव इतना गहरा है कि शिक्षक व स्टाफ कुर्सियों पर ही सो जाते हैं। कहा जा सकता है कि अब शिक्षा विभाग को भी जागृति अभियान की जरूरत है ] लेकिन यह बच्चों के लिए नहीं, बल्कि अपने शिक्षकों और अधिकारियों के लिए। जब गुरु ही निद्रा में डूबे हों, तो शिक्षा का सूरज कैसे उगेगा? फिलहाल सतना के स्कूलों में ज्ञान नहीं, आराम की व्यवस्था चर्चा में है।
कार्रवाई के लिए प्रावधान, डीईओ पर टिकी नजर
विडंबना यह है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई शिक्षकों की नींद में डूबी तस्वीरें वायरल हो चुकी हैं। कुछ पर हल्की-फुल्की नोटिस कार्रवाई हुई, लेकिन अधिकांश मामलों में मामला सपनों की तरह ठंडे बस्ते में चला गया। सवाल यह है कि जब शिक्षक खुद शिक्षा काल में सोएंगे तो विद्यार्थी जागेंगे कैसे? शिक्षा विभाग की चुप्पी भी इस पूरे प्रकरण में उतनी ही गहरी है जितनी इन शिक्षकों की नींद। न निरीक्षण, न अनुशासन बस एक लंबा मौन। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 और शिक्षा विभागीय अनुशासनात्मक नियमावली के तहत ऐसे मामलों में कार्य में लापरवाही और कर्तव्य के प्रति उदासीनता के लिए निलंबन, वेतनवृद्धि रोकना, या स्पष्टीकरण मागने जैसी कार्यवाही हो सकती है। अब सबकी निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी कंचन श्रीवास्तव पर टिकी हैं कि क्या वे इस बार इन‘ सोते हुए गुरुओं’ पर कोई ठोस कार्रवाई करेंगी, या फिर विभाग की परंपरा के मुताबिक यह मामला भी अगली वायरल तस्वीर तक नींद में ही रहेगा?
अभी मेरे पास तो ऐसी जानकारी नहीं आई है, लेकिन यदि ऐसा है तो गंभीर बात है। जानकारी लेकर जांच कराई जाएगी।
कंचन श्रीवास्तव, जिला शिक्षा अधिकारी
प्राचार्य व उच्च श्रेणी शिक्षक की तस्वीरें सामने आई
ताजा मामला प्राचार्य रामसिया प्रजापति का है जिन्होने कुर्सी पर ही निद्रासन जमा लिया और खर्राटे मारने लगे। इसी दौरान किसी ने उन्हें कैमरे में कैद कर लिया । चंद दिनों पूर्व ही यहीं पदस्थ उच्च श्रेणी व्याख्याता सीएल सिंह बघेल भी सोते पाए गए थे। जब प्राचार्य और वरिष्ठ व्याख्याता ही कुर्सी पर सोने के आदी हों तो फिर दूसरा स्टाफ कैसे पीछे रह सकता था। नतीजतन इसी विद्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड -3 कर्मी शेर सिंह कश्यप भी कुर्सी में सोते मिले। एक माह केभीतर तस्वीरों में प्राचार्य रामसिया प्रजापति और सहायक ग्रेड-3 शेर सिंह कश्यप अपने-अपने आरामदायक आसनों में सोते दिखे । कोई टेबल पर सिर टिकाए, तो कोई कुर्सी पर ही पैर पसारकर गहरी निद्रा में मग्न। देखने वालों ने तंज कसा कि विद्यालय में बच्चों को नहीं, नींद को साक्षर किया जा रहा है।


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