पत्रकार धीरेंद्र सिंह राठौर के ब्लॉग पावर गैलरी में पढ़िए — कैसे एक नेता जी दो चुनाव हारने के बाद बिजली के मीटरों की चिंगारी से फिर राजनीति में कूद पड़े हैं। साथ ही जानिए कि कैसे सरकारी कर्मचारी ट्रांसफर के बाद भी अधर में लटके हैं, अफसरशाही ने जनप्रतिनिधियों को बेबस कर दिया है और सरपंच साहब ने पंचायत भवन को दुकान में बदल डाला है।

हाइलाइट्स
झटका लगा... नेता जी जगे!
लंबे समय से राजनीतिक कोमा में पड़े पड़ोसी जिले के नेता जी आखिरकार जाग उठे हैं वो भी 'बिजली के झटके' से। अपने स्टाइलिश पहनावे के लिए पहचाने जाने वाले नेता जी दो लगातार चुनाव हारने के बाद कहीं गायब हो गए थे। अब स्मार्ट मीटर की चिंगारी ने उन्हें फिर से जमीनी राजनीति में धकेल दिया है। जनता को मीटरों से लग रहे झटकों को हथियार बनाकर नेता जी फिर से सियासी मैदान में कूद पड़े हैं। नेता जी की अचानक सक्रियता देखकर सत्ता और विपक्ष दोनों को ही करंट लग गया है। अब देखना ये है कि ये वापसी 440 वोल्ट की साबित होती है या फिर फ्यूज उड़ाने वाली।
अधर में लटके
'न खुदा ही मिला न विसाल-ए -सनम, न इधर के हुए न उधर के हुए ' —ये शेर अब सिर्फ इश्क वालों पर नहीं, सरकारी कर्मचारियों पर भी लागू हो गया है। एक विभाग में तबादला पाकर स्टे पर लौटे दो कर्मचारी ऐसे अधर में लटके हैं, जैसे परीक्षा में पास होकर भी रिजल्ट अटका हो। साहब हैं कि नियमों की तलवार लहराकर ज्वॉइनिंग नहीं करा रहे हैं। कर्मचारी हैं कि हर दिन नई उम्मीद लेकर कार्यालय की परिक्रमा कर रहे हैं। अब न तो ये नई जगह जा पा रहे, ना ही पुरानी जगह काम शुरू कर पा रहे। सरकारी अहं की इस रस्साकशी में कर्मचारी त्रिशंकु बन घूम रहे हैं । अहं के टकराव में कर्मचारियों को न 'स्वर्ग मिल रहा न धरती'।
सिर पर बैठा तंत्र, प्रतिनिधि बेबस
शहर की जनता और उनके चुने हुए जनप्रतिनिधि, दोनों ही सरकारी सिस्टम से त्रस्त हैं। यहां अधिकारी ऐसे तने बैठे हैं जैसे कुर्सी उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो। प्रतिनिधियों का दर्द अब छिपा नहीं रहा, वो खुलेआम बोल रहे हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। चाहे भ्रष्टाचार की बात हो या विकास की, अधिकारी हर मोर्चे पर अपनी धौंस जमाए बैठे हैं। लोकतंत्र यहां सिर के बल खड़ा है और कर्मचारी जनप्रतिनिधियों के सिर पर बैठे हैं। यहां अफसर राजा और नेता प्रजा बन चुके हैं। ऐसे में बड़ा से बड़ा जनप्रतिनिधि भी अपने आप को मजबूर और बेबस पा रहा है, वह सिर्फ निर्देश देने तक ही सीमित होकर रह गया है।
सरपंच साहब का मल्टीब्रांड स्टोर
गांवों के विकास का जिम्मा लिए सरपंच साहब खुद के विकास में जुटे हैं। पंचायत भवन से ज्यादा चमक उनकी दुकान पर है जहां मिठाई, दूध, सीमेंट, रेत और गिट्टी सब कुछ मिलता है। विकास की योजनाएं वहीं से कैल्क्युलेट होती हैं। अब सरपंच जी के लिए पंचायत सिर्फ एक नाम है, असली विकास तो उनके निजी खातों और गोदामों में हो रहा है। गांव वालों को सड़क-पानी मिले न मिले, साहब की दुकान पर हर चीज कमीशन सहित मौजूद है। लगता है पंचायती-राज नहीं, सरपंची-राज चल रहा है।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
मध्यप्रदेश के चंबल अंचल विशेषकर भिंड, मुरैना, श्योपुर और ग्वालियर में रेत माफिया द्वारा वन, पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों पर हमले एक पुरानी और गंभीर समस्या है। माफिया ने कई बार प्रशासनिक वाहनों पर ट्रैक्टर चढ़ाकर या सीधे फायरिंग कर अधिकारियों को निशाना बनाया है।
पत्रकार करण उपाध्याय के कॉलम प्लेटफ़ॉर्म में सतना रेलवे विभाग के गलियारों में घूम रही दिलचस्प कहानियां – किसी अधिकारी की मलाईखोरी के किस्से, किसी की ईमानदारी की दुहाई, विकास की धीमी चाल और खुरचन की मिठास तक। प्लेटफॉर्म पर सुनाई दे रही ये चर्चाएं यात्री से लेकर अफसर तक सबको गुदगुदा रही हैं।
प्रो. रवीन्द्रनाथ तिवारी अपने लेख में कहते हैं कि भारत की 79 वर्षों की स्वाधीनता यात्रा अब वास्तविक स्वतंत्रता की ओर अग्रसर है। वे बताते हैं कि राजनीतिक आज़ादी पर्याप्त नहीं, बल्कि शिक्षा, न्याय, अर्थव्यवस्था और संस्कृति में ‘स्व’ के तंत्र की स्थापना ही असली राष्ट्रनिर्माण है। अमृतकाल का संकल्प भारत को विश्वगुरु पद पर प्रतिष्ठित करने का है।
जयराम शुक्ल अपने लेख में बताते हैं कि असली राष्ट्रप्रेम तिरंगा रैली निकालने या दिखावे से नहीं, बल्कि अपने-अपने दायित्व को ईमानदारी और निष्ठा से निभाने में है। शहीद पद्मधर सिंह से लेकर कैप्टन विक्रम बत्रा तक के बलिदान का स्मरण करते हुए वे कहते हैं कि तिरंगा आचरण में दिखना चाहिए, आवरण में नहीं।
इस रिपोर्ट में जानिए कैसे सरकारी अस्पतालों में मरीजों से चंदा वसूला जा रहा है, निजी अस्पतालों को विभागीय बाबुओं का संरक्षण मिला है और स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें फैल चुकी हैं। पढ़ें ब्रजेश पाण्डेय की खास रिपोर्ट जो उठाती है स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई की परतें।
रीवा की राजनीति में एक बार फिर श्रीनिवास तिवारी की जयंती पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं। वहीं बीजेपी में आंतरिक असंतोष, कांग्रेस को बैठे-बिठाए मिला मुद्दा, और निगम-मंडल की कुर्सियों के लिए शुरू हुआ जोड़-जुगाड़, इन सबने विंध्य की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है। पढ़ें वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर मिश्रा का ब्लॉग पॉवर गैलेरी।
पत्रकार धीरेंद्र सिंह राठौर के ब्लॉग पावर गैलरी में पढ़िए — कैसे एक नेता जी दो चुनाव हारने के बाद बिजली के मीटरों की चिंगारी से फिर राजनीति में कूद पड़े हैं। साथ ही जानिए कि कैसे सरकारी कर्मचारी ट्रांसफर के बाद भी अधर में लटके हैं, अफसरशाही ने जनप्रतिनिधियों को बेबस कर दिया है और सरपंच साहब ने पंचायत भवन को दुकान में बदल डाला है।
सतना संभाग में बिजली विभाग की ‘कुर्सी’ को लेकर मची होड़, नए अफसर के आने से विभाग में लगा ‘करंट’। स्मार्ट मीटर से लेकर वसूली तक की नई योजनाएं, और गर्मी में सोए अधिकारी अब बारिश में ‘चार्ज’ होकर आम जनता पर टूटे। पढ़ें बृजेश पाण्डेय की तीखी और चुटीली रिपोर्ट।
रीवा में आयोजित पर्यटन कान्क्लेव ने विंध्य क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चित्रकूट, मुकुंदपुर, संजय दुबरी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने की पहल न केवल क्षेत्रीय विकास, बल्कि रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को भी गति देगी।
सतना के जिला अस्पताल में ब्लड बैंक ‘राम’ भरोसे चल रहा है। दलालों की पौ-बारह है और मरीजों की जान आफत में। अधिकारी मौन, जांच सिर्फ चाय तक सीमित। इंजीनियर से लेकर ठेकेदार तक की करतूतों पर ‘बड़े साहब’ का रौद्र रूप देखने को मिला, लेकिन कार्रवाई नदारद। पढ़िए पत्रकार बृजेश पांडे का ब्लॉग।