रीवा-सतना और मानिकपुर-जबलपुर रेलखंड में ट्रेनों के साथ ड्रोन उड़ाकर निगरानी की जाएगी। पत्थरबाजी, रेलवे ट्रैक पर रील बनाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए आरपीएफ को त्वरित कार्रवाई में मदद मिलेगी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
रेलवे अब तेजी से हाईटेक हो रहा है। रेलवे ट्रैक पर रील बनाने और ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वाले शरारती तत्वों पर अब आसमान से नजर रखी जा सकेगी। जल्द ही आने वाले समय में रेलवे ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने के लिए रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) को आधुनिक ड्रोन उपलब्ध क राएगा। यह ड्रोन रीवा-सतना एवं मानिकपुर से जबलपुर रेलखंड के बीच सेक्शन में ट्रेनों के साथ उड़ाए जाएंगे, जिससे रेलवे ट्रैक और आसपास की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी। उल्लेखनीय है कि मानिकपुर-सतना-जबलपुर रेलखंड में आए दिन ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। जानकारों के अनुसार आरपीएफ पोस्ट को दिए गए ड्रोन सीधे कंट्रोल रूम से जुड़े रहेंगे। ट्रेन गुजरने के दौरान ड्रोन सेक्शन में उड़ाए जाएंगे और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगे। ड्रोन से मिलने वाली लाइव फुटेज कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और उसका रिकार्ड भी सुरक्षित रखा जाएगा।
रेलवे के साथ यात्रियों तक को नुकसान
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक ट्रेनों पर पत्थरबाजी से न सिर्फ रेलवे को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। इसी को देखते हुए अब हाईटेक निगरानी सिस्टम लागू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि अभी केवल स्टेशनों में ही सीसीटीवी कैमरे से ही संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी जाती है। ड्रोन की निगरानी से रेल हादसों पर बचाव कार्य में भी काफी मदद मिल सकेगी।
आरोपियों को पकड़ने में होगी आसानी
इंटरसिटी से लेकर मेल, सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनों पर भी पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कई मामलों में आरोपी पकड़ लिए जाते हैं, लेकिन कई बार अंधेरे और सुनसान इलाकों का फायदा उठाकर भाग जाते हैं। इसके अलावा इंटरनेट मीडिया पर डालने के लिए रील बनाने वाले युवक-युवतियां भी रेलवे ट्रैक पर आ जाते हैं। ऐसे में अब ड्रोन के माध्यम से इनकी निगरानी की जा सकेगी।
मिल चुका प्रशिक्षण
बताया जाता है कि तैयारियों को लेकर सतना, मैहर आरपीएफ पोस्ट समेत जबलपुर मंडल के अन्य स्टेशनों के आरपीएफ बल के दो-दो जवानों को ड्रोन उड़ाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। अब धीरे-धीरे कर अन्य जवानों को भी प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे अलग-अलग शिफ्ट में ये जवान ड्रोन को उड़ाकर ट्रेनों व ट्रैक की निगरानी कर सकें।


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