अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82% और खाद्य महंगाई 5.95% पर पहुंच गई है। थोक महंगाई में भी उछाल आया है। जानें RBI के नए अनुमान और महंगाई से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।

देश में एक बार फिर बढ़ती महंगाई ने आम आदमी के घर का बजट बिगाड़ दिया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गई है। महंगाई में यह इजाफा मुख्य रूप से रसोई में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने के कारण हुआ है। आइए जानते हैं इस आर्थिक स्थिति से जुड़े सभी महत्वपूर्ण पहलू।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर जुलाई महीने में 4.45 फीसदी थी, जो अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई। इसके साथ ही, खाद्य महंगाई दर (Food Inflation) अगस्त में उछलकर 5.95 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 5.52 फीसदी पर थी। सब्जियों, अनाजों और अन्य खाद्य वस्तुओं के महंगे होने से आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
केवल खुदरा ही नहीं, बल्कि थोक मूल्य आधारित महंगाई दर (WPI) में भी तेजी देखने को मिली है। अगस्त में थोक महंगाई बढ़कर 9.92 फीसदी हो गई, जो जुलाई में 9.78 फीसदी थी। थोक महंगाई में यह वृद्धि खाद्य पदार्थों के अलावा ईंधन (Fuel) और विनिर्मित वस्तुओं (Manufactured Goods) की कीमतों में तेजी के कारण हुई है। अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर यह स्थिति एक दोहरी चुनौती पेश कर रही है।
बढ़ती कीमतों के दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक है। केंद्रीय बैंक का आधिकारिक जनादेश खुदरा महंगाई को 2 फीसदी से 6 फीसदी की स्वीकार्य सीमा के भीतर रखना है। इन तमाम दबावों के बावजूद, हाल ही में आरबीआई ने प्रमुख अल्पकालिक नीतिगत दरों को अपरिवर्तित (Unchanged) रखा है, जो केंद्रीय बैंक की सतर्क रुख को दर्शाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सीपीआई महंगाई का औसत अनुमान 5 फीसदी लगाया है। तिमाही आधार पर इस अनुमान में दूसरी तिमाही के लिए 4.7 फीसदी, तीसरी तिमाही के लिए 5.9 फीसदी और चौथी तिमाही के लिए 5.5 फीसदी का अनुमान शामिल किया गया है। केंद्रीय बैंक लगातार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है ताकि आम आदमी को राहत मिल सके।
खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने देश के नीति निर्माताओं और आम नागरिकों दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। हालांकि आरबीआई महंगाई को काबू में रखने के लिए लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान और घरेलू आपूर्ति की स्थिति यह तय करेगी कि आने वाले महीनों में महंगाई से कितनी राहत मिल पाती है।
अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82% और खाद्य महंगाई 5.95% पर पहुंच गई है। थोक महंगाई में भी उछाल आया है। जानें RBI के नए अनुमान और महंगाई से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।
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सोने-चांदी के दाम में आज गिरावट दर्ज की गई। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 269 रुपए गिरकर 1.53 लाख रुपए पर आ गई है। एक किलो चांदी की कीमत 3,742 रुपए कम होकर करीब 2.30 लाख रुपए हो गई है।
एपल ने देर रात लॉन्च इवेंट सरप्राइज एंड शाइन में अपने पहले फोल्डेबल फोन आईफोन डुओ के साथ 6 डिवाइस लॉन्च किए। आईफोन डुओ में 5.4-इंच का कवर डिस्प्ले और अंदर 7.6-इंच की मेन स्क्रीन है, जो अब तक के किसी भी आईफोन का सबसे बड़ा डिस्प्ले है।
स्मार्टफोन की दुनिया में फोल्डेबल फोन कभी महज एक महंगा प्रयोग माने जाते थे, लेकिन अब यह प्रीमियम मोबाइल बाजार का अहम हिस्सा बन चुके हैं। इस बदलाव में सैमसंग की भूमिका सबसे बड़ी रही है। यानी जिस बाजार को सैमसंग ने कई साल तक तैयार किया, वहां अब एपल सीधे प्रीमियम सेगमेंट में मुकाबले के लिए उतरने वाला है।
भारतीय शेयर बाजार आज कारोबारी सत्र में लाल निशान में खुला। सेंसेक्स 533 अंक या 0.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,044 और निफ्टी 135 अंक या 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,498 पर था। शुरुआती कारोबार में बाजार पर दबाव बनाने का काम आईटी और सर्विसेज सेक्टर ने किया।
भारतीय शेयर बाजार में आज भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 400 अंक लुढ़क गया। निफ्टी भी 23,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे आ गया। अडानी एंटरप्राइजेज और एक्सिस बैंक सबसे ज्यादा नुकसान वाले शेयरों में रहे। दरअसल, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बाजार पर दबाव डाल रही हैं।
सोना-चांदी की कीमतों में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को खुलने के साथ ही गिरावट देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर गोल्ड-सिल्वर के वायदा भाव बीते सप्ताह की गिरावट जारी रही और दोनों कीमती धातुएं सस्ती हो गईं।
भारतीय शेयर बाजार में आज से प्री-ओपन आक्शन सेशन के नियमों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। एनएसई द्वारा शुरू किए गए इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य शुरूआती कीमतों के निर्धारण को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। इसके साथ ही, अंतिम क्षणों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को भी कम किया जा सकेगा।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है। जानिए टाटा समूह के अगले चेयरमैन की रेस में सबसे आगे चल रहे टी.वी. नरेंद्रन, सौरभ अग्रवाल और आशीष चौहान का पूरा प्रोफाइल।

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