रीवा में 11 केवी लाइन सुधार के दौरान झुलसे कर्मचारी की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने ठेकेदार पर एफआईआर और मुआवजे की मांग को लेकर अस्पताल में हंगामा किया।
By: Yogesh Patel
Mar 17, 202610:11 PM
हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
विद्युत विभाग की 11 हजार केव्ही लाइन का सुधार करते वक्त गत दिवस एक आउटसोर्स कर्मचारी बुरी तरह से झुलस गया था। कर्मचारी का संजय गांधी अस्पताल में उपचार चल रहा था, जहां बीती रात उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने सोमवार को अस्पताल में हंगामा करते हुये ठेकेदार पर प्रकरण दर्ज करने की मांग की। इस दौरान मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को शांत करा कर उचित कार्यवाही करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद मृतक का पोस्टमार्टम हो सका। अब पुलिस मर्ग कायम कर घटना की जांच कर रही है।
बताया जा रहा है कि ताला थाना अंतर्गत अजमाइन निवासी राजकुमार दाहिया 37 वर्ष विद्युत लाइन डालने का काम करने वाली अशोका आरबीएनएन कंपनी में काम करता था। गत दिवस सिरमौर के पड़री गांव में लाइन सुधार कर रहा था। तभी आॅपरेटर ने विद्युत लाइन को चालू कर दिया, जिसकी वजह से कर्मचारी बुरी तरह से झुलस गया। गंभीर हालत में उसे उपचार के लिये संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी रविवार की रात मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने सोमवार की सुबह हंगामा खड़ा कर दिया। परिजनों की मांग थी कि मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाये और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो। दोपहर तक चले हंगामा के बीच अमहिया पुलिस पहुंची। पुलिस ने परिजनों से बात कर न्यायपूर्ण कार्रवाई करने का भरोसा दिया, जिसके बाद परिजन माने और मृतक का पोस्टमार्टम हो सका। अब सिरमौर पुलिस मर्ग कायम कर घटना की जांच कर रही है।
कट गये थे एक हाथ व पैर
परिजनों ने बताया कि राजकुमार करंट की वजह से बुरी तरह से झुलस गया था। जिसके बाद उसे उपचार के लिये अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां चिकित्सकों ने उसका एक हाथ व पैर काट दिया था। लेकिन इसके बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इंफेक्शन फैलता गया और रविवार को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने इसका जिम्मेदार ठेकेदार शुभम सिंह परिहार निवासी रायपुर कर्चुलियान को ठहराया है।
11 दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर
इस मामले में पुलिस पर भी लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। परिजनों के अनुसार घटना 27 फरवरी को हुई थी। परिजनों ने इसकी सूचना जानकारी होते ही पुलिस को दिया था। लेकिन पुलिस एफआईआर दर्ज करने को तैयार नहीं थी। विवाद बढ़ने पर किसी तरह 9 मार्च को एफआईआर दर्ज किया। बावजूद इसके राजकुमार का बयान लेने पुलिस अस्पताल नहीं पहुंची और उसकी मौत हो गई।