सतना जिले में मातृ मृत्यु के मामले बढ़कर 37 पहुंचे, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाते हैं। एनीमिया, हाई बीपी और समय पर इलाज न मिलने से अधिकतर मौतें हुईं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में इस वर्ष मातृ मृत्यु के मामलों में बढोत्तरी ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आंकड़ों के अनुसार अपै्रल 2025 से मार्च 2026 के बीच 37 महिलाओं ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि पिछले वर्ष 2024-25 में 32 महिलाओं की मौत हुई थी। इससे साफ है कि इलाज के दौरान मौत का आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है। ये आंकड़े सिर्फ संख्या ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की जमीनी हकीकत को उजागर कर रहे हैं। सवाल यह है कि जब सरकार सुरक्षित मातृत्व और संस्थागत प्रसव को लेकर कई योजनाएं चला रही है तो फि र ऐसी मौतें क्यों नहीं रुक पा रहीं।
समय पर इलाज के अभाव से हुई मौत
चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो समय पर महिलाओं को इलाज न मिलना, प्रसव के दौरान जटिलताएं, एनीमिया और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते ये मौतों का ग्राफ बढ़ रहा है, वहीं कई मामलों में रेफरल सिस्टम की धीमी प्रक्रिया भी जानलेवा साबित हो रही है। स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला भी महिलाओं को जागरुक नहीं कर पा रहा है। कई ग्रामीण अंचल ऐसे भी हैं जहां फील्ड वर्कर गर्भवती महिलाओं के घर-घर तक विजिट नहीं कर पा रहे हैं। समय रहते अगर स्वास्थ्य विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो यह आंकड़ा दिन-ब-दिन बढ़ता ही जाएगा।
गंभीर एनीमिया व हाई बीपी ने ली सर्वाधिक जान
मातृ मृत्यु दर की रिपोर्ट के अनुसार साल भर में हुई 37 मौतों में से सर्वाधिक मौत हाई बीपी व गंभीर एनीमिया के कारण हुई हैं जो कि स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है। हर माह सुरक्षित मातृत्व अभियान आयोजित होने के बाद भी गर्भवती महिलाएं एनीमिक से पीड़ित मिल रही हैं। आंकड़ों के अनुसार 11 महिलाओं की मौत गंभीर एनीमिया की वजह से हुई है। इन्हें समय पर एनीमिया से बचाव के उपचार नहीं दिए गए। जबकि 12 मौतें गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी के चलते हुई हैं। सिकिल सेल बीमारी से 1, सेप्सिस से 2, ज्वाइंडिस से 1 मौत दर्ज की गई।
सतना शहरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा मौत
आंकड़ों के अनुसार एक साल में 37 महिलाओं की मौत हुई है, जिसमें सतना शहरी क्षेत्र सबसे आगे है, यहां साल भर में सात मौतें हुई हैं। विकासखंडों की बात करें तो नागौद में 5, मझगवां में 6, रामपुर बाघेलान में 5, उचेहरा में 5, सोहावल में 9 मौतें दर्ज की गई हैं।

रीवा में नीट यूजी परीक्षा के दौरान सख्ती इतनी रही कि छात्राओं को फुलिया उतरवाने के लिए सुनार बुलाना पड़ा। जूते, गहने और कई वस्तुएं बाहर रखवाकर ही परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया गया।
विंध्य विकास प्राधिकरण में नियुक्तियों के बाद भाजपा में खुशी के साथ असंतोष भी दिखा। समर्पित कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित मान रहे हैं, जबकि बिना कार्यालय और बजट के विकास कार्यों पर सवाल उठ रहे हैं।
रीवा में तेज रफ्तार कार ने ई-रिक्शा को टक्कर मारी, हादसे में महिला की मौत और पति घायल हुआ। आक्रोशित परिजनों ने सड़क जाम किया, प्रशासन ने मुआवजा और सहायता का आश्वासन दिया।
सीधी जिले में एनएच-39 पर युवक को वाहन ने टक्कर मारकर फिर कुचल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने हत्या जैसे आरोप लगाए हैं, जबकि चालक बिना लाइसेंस बताया जा रहा, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
सतना जिले में नरवाई जलाने के मामलों पर सैटेलाइट मॉनिटरिंग से कार्रवाई हुई। आठ किसानों को नोटिस और छह को कोर्ट में पेशी के निर्देश दिए गए, फिर भी प्रशासनिक सख्ती पर सवाल उठ रहे हैं।
सतना जिले में मातृ मृत्यु के मामले बढ़कर 37 पहुंचे, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाते हैं। एनीमिया, हाई बीपी और समय पर इलाज न मिलने से अधिकतर मौतें हुईं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी।
सतना जिले में ट्रेन और सड़क हादसों में तेंदुओं की मौत से वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। मैहर में तेंदुए की मौजूदगी से दहशत, जबकि अवैध शिकार मामले में चार आरोपी गिरफ्तार किए गए।
जौनपुर जंक्शन पर यार्ड रिमॉडलिंग के चलते 4 से 27 मई तक 13 ट्रेनों के मार्ग बदले गए हैं। गोंदिया-बरौनी और ताप्ती गंगा एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें प्रभावित रहेंगी, यात्रियों को परेशानी होगी।
सतना जिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में पुरुषों की भीड़ से प्रसूताओं की निजता और सुरक्षा खतरे में है। अव्यवस्था, गेट पास बंद और अटेंडरों की अनियंत्रित संख्या से संक्रमण और विवाद की आशंका बढ़ी।
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