एनएचएम ने मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हर मातृ मृत्यु की वर्बल ऑटोप्सी, समयबद्ध जांच और मासिक समीक्षा अनिवार्य होगी। नियमों के पालन पर ही प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
सीधी जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान 53 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व या प्रसव बाद मौत दर्ज हुई। चिंताजनक आंकड़ों ने स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय संसाधनों और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रीवा में आयोजित कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मातृ मृत्यु दर को 70 से नीचे लाने का लक्ष्य बताया। संस्थागत प्रसव, नियमित जांच और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर दिया गया।
सतना जिले में मातृ मृत्यु के मामले बढ़कर 37 पहुंचे, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाते हैं। एनीमिया, हाई बीपी और समय पर इलाज न मिलने से अधिकतर मौतें हुईं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी।
रीवा में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस के तहत नवजात शिशुओं की देखभाल और किशोर मानसिक स्वास्थ्य पर प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास तथा यूनिसेफ के सहयोग से समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

















