रीवा जिले में गेहूं खरीदी की घोषणा के तीन दिन बाद भी एक क्विंटल तौल नहीं हुई। बारदाने की कमी, भरे गोदाम और प्रशासनिक लापरवाही से किसान परेशान होकर लौट रहे हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की शुरूआत कागजों में तो हो गई है, लेकिन धरातल पर सन्नाटा पसरा हुआ है। प्रशासन द्वारा 15 अप्रैल से खरीदी शुरू करने के सख्त निर्देश दिए गए थे, लेकिन 17 अप्रैल बीत जाने के बाद भी जिले के 168 खरीदी केंद्रों में से किसी पर भी एक क्विंटल अनाज की तौल नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि 'बोहनी' का इंतजार कर रहे किसान अब केंद्रों से खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
गोदामों में जगह नहीं, नॉन के पास बोरे नहीं
इस बार गेहूं खरीदी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बारदानों की अनुपलब्धता बनकर उभरा है। नागरिक आपूर्ति निगम (नॉन) के पास नए बारदानों का अभाव है, और पुराने बारदाने अभी भी धान की पैकिंग में फंसे हुए हैं। जिले के लगभग सभी गोदाम पिछले सीजन की धान से पूरी तरह भरे हुए हैं। नियमानुसार धान की मिलिंग के लिए उठाव होना था, जिससे बारदाने खाली होते और उनका उपयोग गेहूं खरीदी में किया जाता। लेकिन मिलिंग की कछुआ चाल ने पूरी व्यवस्था को ठप कर दिया है। नागरिक आपूर्ति निगम के पास न तो नए बारदानों का पर्याप्त स्टॉक है और न ही पुराने बारदानों को खाली कराने की कोई ठोस योजना।
किसानों की बढ़ती चिंता
गेहूं की फसल कटकर तैयार है और मंडियों में आने को बेताब है। ऐसे में अगर समय पर खरीदी शुरू नहीं हुई, तो किसानों को अपनी उपज कम दामों पर बिचौलियों को बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा। साथ ही, मौसम के बदलते मिजाज ने भी किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। खुले में रखा अनाज बारिश की भेंट चढ़ सकता है। धान का उठाव अगर समय रहते नहीं हुआ, तो इस साल गेहूं की खरीदी का लक्ष्य पूरा करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।
प्रशासनिक आदेशों की उड़ रही धज्जियां
कलेक्टर और जिला प्रशासन ने 15 अप्रैल से सुचारू खरीदी के दावे किए थे, लेकिन हकीकत में खरीदी केंद्रों के प्रभारी केवल टालमटोल कर रहे हैं। जब किसान अपनी उपज लेकर पहुंच रहे हैं, तो उन्हें बारदाने न होने का हवाला देकर वापस भेजा जा रहा है। अधिकारियों के बीच भी इस बात को लेकर संशय है कि क्या नए बारदाने खरीदे जाएंगे या फिर धान के उठाव का इंतजार किया जाएगा।


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