सतना नगर निगम ने अमृत परियोजना के करीब 30 करोड़ रुपये के ठेके को समय-सीमा और तीन माह की अतिरिक्त मोहलत के बाद भी काम अधूरा रहने पर समाप्त कर दिया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अमृत परियोजना के तहत करीब 30 करोड़ रुपये में दिया गया जियो मिलर एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड का ठेका आखिरकार नगर निगम ने समाप्त कर दिया। मूल समय-सीमा और इसके बाद दी गई तीन माह की समयवृद्धि बीतने के बावजूद काम पूरा नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए निगमायुक्त डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा ने 1 अक्टूबर को अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की। फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने के साथ निगम ने उसके साथ व्यावसायिक संबंध समाप्त करने का भी निर्णय लिया है। मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कार्य सीधे शहर की पेयजल व्यवस्था से जुड़ा था। अमृत परियोजना के अंतर्गत पाइपलाइन विस्तार के साथ चार उच्चस्तरीय टंकियों का निर्माण जियो मिलर एंड कंपनी को सौंपा गया था। करीब 30 करोड़ रुपये के इस कार्य को मूल रूप से 21 दिसंबर 2023 तक पूरा किया जाना था। फर्म के अनुरोध पर तीन माह की समयवृद्धि देते हुए अंतिम तिथि 31 मार्च 2024 निर्धारित की गई, लेकिन यह समय-सीमा भी निकल गई। इसके बाद करीब 18 माह बीत जाने के बावजूद परियोजना के कई महत्वपूर्ण कार्य अधूरे रहे। 24 घंटे के भी पेयजल व्यवस्था से जुड़े दो ठेकों पर हुई कार्रवाई ने नगर निगम की कार्यप्रणाली में जवाबदेही के मुद्दे को भी सामने ला दिया है। अब अमृत परियोजना के अधूरे काम को नई एजेंसी के माध्यम से पूरा कराना निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, ताकि करोड़ों रुपये की परियोजना कागजों से निकलकर शहरवासियों को वास्तविक पेयजल सुविधा दे सके।
कारण बताओ नोटिस फिर भी नहीं बदली कार्यप्रणाली
कार्य में लगातार हो रही देरी को लेकर नगर निगम ने 25 सितंबर 2025 को फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। निगम के अनुसार फर्म से देरी का कारण पूछा गया और उसका जवाब भी प्राप्त हुआ, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद कार्य की प्रगति और फर्म की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई, जिसमें अनुबंध की शर्तों के अनुपालन से जुड़ी कई कमियां सामने आने की बात निगम ने कही। पर्याप्त अवसर और निर्देश दिए जाने के बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं होने पर अंतत: अनुबंध समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
अब जोखिम और लागत पर नई निविदा
अनुबंध समाप्त होने के बाद अमृत परियोजना के अधूरे कार्यों का नए सिरे से आकलन किया जाएगा। निगम ने रिस्क एंड कॉस्ट के आधार पर नई निविदा जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। नई एजेंसी के माध्यम से अधूरे कार्य पूरे कराए जाएंगे। नियमों के तहत पूर्व एजेंसी से संबंधित वित्तीय दायित्वों की वसूली का प्रावधान भी लागू किया जा सकता है। अब चुनौती यह है कि नई निविदा की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और अधूरी पाइपलाइन, उच्चस्तरीय टंकियां, परीक्षण, मोटर-पंप तथा जलशोधन संयंत्र जैसे कार्य कब तक पूरे होकर शहरवासियों को परियोजना का वास्तविक लाभ दे पाते हैं।
टंकियां अधूरी, पाइपलाइन की टेस्टिंग तक नहीं
नगर निगम की समीक्षा में काम की स्थिति को लेकर कई गंभीर कमियां सामने आईं। उच्चस्तरीय टंकियों का निर्माण पूरा नहीं हुआ। पाइपलाइन बिछाने के बाद कई स्थानों पर सड़कों का समुचित पुनर्स्थापन नहीं किया गया। पाइपलाइनों का परीक्षण नहीं हुआ और आपूर्ति किए गए मोटर-पंपों को स्थापित कर चालू नहीं किया गया। ग्लसर जलशोधन संयंत्र का कार्य भी अधूरा बताया गया है। निगम की समीक्षा में समय पर कार्य पूरा नहीं करना, सक्षम स्वीकृति के बिना कार्य दूसरे फर्म को सौंपना, कार्य योजना एवं कार्य कार्यक्रम प्रस्तुत नहीं करना, पर्याप्त अनुभवी श्रमिकों का उपयोग नहीं करना, निर्धारित मानक की सामग्री का उपयोग नहीं करना तथा पाइपलाइन को निर्धारित गहराई तक नहीं ले जाना जैसी कमियां भी सामने आईं।
गुणवत्ता और समय-सीमा से समझौता नहीं
जियो मिलर के काम को लेकर निगम के भीतर असंतोष पहले से सामने आता रहा है। महापौर योगेश ताम्रकार भी परियोजना में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जता चुके हैं, जबकि निगम अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी पालन ने निगमायुक्त को पत्र लिखकर टेंडर समाप्त करने की मांग की थी। ऐसे में अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई को लंबे समय से चल रही शिकायतों और समीक्षा के बाद उठाया गया कदम माना जा रहा है। मेयर और अध्यक्ष ने साफ कहा है कि जनहित के कामों में ऐिसी गफलत कोई भी करे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पेयजल संचालन वाली दूसरी कंपनी पर भी कार्रवाई
इसी दिन निगमायुक्त ने पेयजल व्यवस्था के संचालन एवं संधारण में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर मेसर्स कृष्णा कन्स्ट्रक्शन कंपनी का संबंधित अनुबंध भी समाप्त कर दिया। कंपनी 18 एमएलडी और 40 एमएलडी जलशोधन संयंत्रों के संचालन एवं संधारण का कार्य कर रही थी। पेयजल की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिलने के बाद कंपनी को संचालन एवं संधारण व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार निर्देश दिए गए थे। पर्याप्त अवसर और अंतिम निर्देश दिए जाने के बावजूद निर्धारित अवधि में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर 1 अक्टूबर को अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई की गई।
नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों में गुणवत्ता, समय-सीमा और अनुबंध की शर्तों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बार-बार निर्देश और पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद सुधार नहीं करने वाली एजेंसियों को रियायत नहीं दी जाएगी। अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन और गंभीर लापरवाही की स्थिति में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा , निगमायुक्त

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