सतना के मझगवां में मासूम की मौत पर स्वास्थ्य विभाग में मतभेद, सीएमएचओ ने दूध फंसने को कारण बताया, जबकि डीआईओ ने कुपोषण जिम्मेदार ठहराया, जांच में लापरवाही और सरकारी योजनाओं की कमी उजागर हुई।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सतना जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र मझगवां में रविवार- सोमवार की दरम्यिानी रात हुई मासूम की मौत के मामले में स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों के दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज शुक्ला ने जहां मासूम की मौत का कारण श्वास नली में दूध फंसने और दम घुटने को बताया है, वहीं दूसरी तरफ जिला टीकाकरण अधिकारी (डीआईओ) डॉ. सुचित्रा अग्रवाल ने मासूम की मौत का कारण कुपोषण ही माना है। उनका दावा है कि कुपोषण के चलते ही बच्ची बीमार रह रही थी, जिसकी वजह से मौत हुई। इस संबंध में जिला टीककरण अधिकारी मझगवां एसडीएम को बुधवार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट देंगी। बताया गया कि रविवार की रात मझगवां विखं के कैमहा महतैन गांव की भारती मवासी पिता राजललन मवासी उम्र 11 माह 21 दिन की मौत हो गई थी। मौत का कारण जानने के लिए प्रशासनिक स्तर एवं स्वास्थ्य-महिला बाल विकास के अधिकारियों द्वारा जांच की गई।
आशा कार्यकर्ता ने भी नहीं निभाई अपनी जिम्मेदारी
गांव में पदस्थ आशा कार्यकर्ता द्वारा भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन गंभीरता से नहीं किया गया। बच्ची जब जन्म से ही बीमार चल रही थी उसके बावजूद आशा कार्यकर्ता द्वारा हायर सेंटर में इलाज के लिए नहीं ले जाया गया। न ही गांव के पीएचसी में इलाज के लिए भेजा गया। एमसीपी कार्ड में भी छेड़छाड़ की बातें सामने आर्इं। पंचनामा में बच्ची का वजन 10 मार्च को 7.1 किग्रा बताया गया था। ये जानकारियां भी गलत बताई गई हैं। विभाग के ही अधिकारियों का मानना है कि बच्ची का वजन धीरे-धीरे बीमारी के चलते कम हो रहा था, कुपोषण की श्रेणी में थी।
पोषण ट्रैकर में नाम नहीं
जानकारी के अनुसार पोषण ट्रैकर में मां और बच्चों का नाम भी दर्ज नहीं है, न तो बच्ची को और न ही मां को पोषण आहार दिया गया, पूरे परिवार को कभी भी टेक होम राशन भी उपलब्ध नहीं हुआ है। यहां की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा परिवार को किसी भी प्रकार की शासकीय सुविधा दिलाने का प्रयास नहीं किया गया। मृतका के बड़े भाई जिसकी उम्र चार साल है, उसका नाम तक पोषण ट्रैक में दर्ज नहीं है। प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रहे तमाम योजनाओं का लाभ भी इस आदिवासी परिवार को उपलब्ध नहीं कराया गया।
बड़ी बात यह है कि मां, भाई और मृतका का आधार कार्ड तक नहीं बना है। जबकि महिला बाल विकास विभाग के आफिसों में ही आधार कार्ड बनवाने की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जानकारों ने बताया कि मृतका की मां के पास अंकसूची भी मौजूद होने के बावजूद आधार कार्ड न बन पाना सरकारी सुविधाओं पर बड़ा तमाचा है।
टीम ने सीएमएचओ के दावे पर लगाई मुहर
इस बीच खबर है कि मामले की जांच के लिए कलेक्टर द्वारा बनाई टीम ने भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के दावे पर अपनी मुहर लगा दी है। टीम ने अपनी रिपोर्ट में मासूम की मौत का कारण श्वसन तंत्र में दूध के फंसना और दम घुटना बताया गया है, टीम ने यह भी दावा किया है कि बच्ची कुपोषित नहीं थी। गौरतलब है कि मंगलवार को कलेक्टर ने एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर, सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला एवं महिला बाल विकास अधिकारी राजीव सिंह की तीन सदस्यीय जांच टीम बनाई थी, जिसने देर शाम जांच रिपोर्ट पेश कर दी है।
बच्ची की मौत कुपोषण के कारण ही हुई है। गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा कार्यकर्ता द्वारा समय पर सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं। पोषण ट्रेकर में परिवार का नाम नहीं है। आशा कार्यकर्ता द्वारा बच्ची का इलाज तक नहीं कराया गया। बच्ची को कुपोषण के चलते उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं बनी रहती थीं। बच्ची का वजन दिन -प्रतिदिन कम हो रहा था। चूंकि मृत्यु के समय कोई चिकित्सकीय परीक्षण, पोस्टमार्टम नहीं हुआ। अत: सटीक कारण की पुष्टि संभव नहीं है।
डॉ. सुचित्रा अग्रवाल, जिला टीकाकरण अधिकारी सतना


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