सतना जिला अस्पताल में नई ब्लड टेस्ट मशीनों का इंस्टालेशन शुरू हो गया है, लेकिन रीजेंट की कमी से कई महत्वपूर्ण जांच रिपोर्टें प्रभावित हैं। टेंडर प्रक्रिया और जांच गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल के नैदानिक केन्द्र परिसर में संचालित रीजनल डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा पांच साल पुरानी ब्लड टेस्ट मशीनों को बदलने का कार्य किया जा रहा है। प्रयोगशाला में नई चाइनीज मशीनें आ गई हैं, जिनका इंस्टालेशन शुरू कर दिया गया है। अब इन मशीनों से ही ब्लड टेस्ट किए जाएंगे। नई मशीनों को फंक्शनल करने के साथ-साथ पुरानी मशीनों से भी कार्य लिया जा रहा है, ताकि कार्य में बाधा न पड़े। बताया जाता है कि पुरानी मशीनों में इम्यूनोलाइजर के रीजेंट खत्म होने की वजह से हितग्राहियों को जांच रिपोर्ट लेने के लिए चक्कर लगाना पड़ रहा है। बीते दो दिन से यह समस्या बानी हुई है जिस पर प्रबंधन द्वारा समबन्धित संस्था को इंजीनियर बुलाने पत्राचार किया गया है। नई मशीनों की स्थापना के लिए इंजीनियरों के शुक्रवार को आने की संभावना जताई जा रही है। जैसे ही नई मशीनें कार्य करने लगेंगी पुरानी को पैक कर कम्पनी को भेज दिया जाएगा।
ये मशीनें होंगी अपडेट
आधुनिक युग में नई मशीनों का ही दौर है, जिला अस्पताल के पैथोलॉजी लैब में लगी मशीनें पांच साल पूर्व स्थापित की गई थीं। मशीनों में अपडेट नहीं हो रहा है जिसके चलते जांच रिपोर्ट आने में देर लगती है। नई मशीनें स्थापित होने के बाद एक साथ कई टेस्ट लगाए जा सकते हैं जिनकी रिपोर्ट भी समय से पहले उपलब्ध हो जाएगी। लैब में बायोकैमिस्ट्री, एचपीएलसी, हेमेटोलॉजी, एचबीएनएसी एवं पीटीआई एनआर जैसी मशीनों को बदल कर नई मशीनें स्थापित की जाएंगी।
तीन नई मशीनें आई, रीजेंट नहीं
बताया गया कि जिला अस्पताल में इम्यूनोलाइजर, बायोकमेस्ट्री एवं हेमेटोलॉजी की एडवांस्ड मशीनें आ चुकी हैं जिन्हें फंक्शनल किया जा रहा है। चूंकि आउटसोर्स संस्था द्वारा मप्र, उप्र एवं बिहार में एक साथ मशीनों को बदलने का कार्य किया जा रहा है जिसके चलते न तो नई मशीनों के रीजेंट उपलब्ध हो पा रहे हैं और न ही पुरानी के। पुरानी मशीनों के रीजेंट न आने की वजह से कई जांचें प्रभावित हो रही हैं। बताया जाता है कि पुरानी इम्यूनोलाइजर मशीन के रीजेंट खत्म होने की वजह से थाइराइड, विटामिन बी-12 एवं विटामिन डी की जांच रिपोर्ट मिलने में देरी हो रही है। कम्पनी द्वारा अपनी संबंधित संस्था भारत लैब को जांच रिपोर्ट भेजी जा रही है जिसके चलते समय लग रहा है। बताया जाता है कि रोजाना 60 से 70 मरीजों का ब्लड टेस्ट इम्यूनोलाइजर मशीन से किया जाता है।
पीओसीटी साइंस हाउस ने लिया 82 प्रतिशत बिलों में टेंडर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भोपाल की आउटसोर्स संस्था पीओसीटी साइंस हाउस प्रा.लि. द्वारा 82 प्रतिशत बिलों में नई मशीनों को स्थापित कर पुरानी को बदलने का टेंडर लिया गया है। चाइना की मिनरे कम्पनी की मशीनें स्थापित की जाएंगी। बड़ी बात यह है कि 82 प्रतिशत बिलों में टेंडर कैसे किया गया? जानकारों ने बताया कि जहां अन्य कम्पनियां 100 रुपए में अगर एक ब्लड टेस्ट करती हैं तो टेंडर ली हुई कम्पनी 18 रुपए में ब्लड टेस्ट करने का दावा कर रही है। ऐसे में गुणवत्ताविहीन जांच रिपोर्ट मिलने की भी आशंका है। कुछ जानकारों का कहना है कि मशीनोंं में सबसे बड़ा खेल रीजेंट का है, कम्पनी के द्वारा करोड़ों की मशीनों को ईएमआई पर आउटसोर्स संस्था को दे दिया जाता है लेकिन जांच में प्रयोग होने वाले रीजेंट को निश्चित कम्पनी से खरीदने को कहा जाता है।


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