सतना जिले में खरीफ सीजन से पहले उर्वरक उपलब्धता चिंता का विषय बन गई है। जरूरत के मुकाबले केवल एक-तिहाई खाद उपलब्ध है, जबकि डीएपी का स्टॉक बेहद सीमित होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
खेतों में बुवाई की तैयारी शुरू हो चुकी है बादल दस्तक दे रहे हैं लेकिन जिले की उर्वरक व्यवस्था अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं दिख रही। कृषि विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि खरीफ सीजन 2026-27 के लिए जिले को 60642 मीट्रिक टन उर्वरक चाहिए जबकि किसानों के लिए फिलहाल उपलब्ध मात्रा सिर्फ 20185 मीट्रिक टन है। यानी जरूरत का केवल एक-तिहाई स्टॉक ही वितरण तंत्र में मौजूद है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस डीएपी पर खरीफ फसलों की शुरूआती बुवाई सबसे ज्यादा निर्भर करती है उसका उपलब्ध स्टॉक महज 1128 मीट्रिक टन बचा है। यह मात्रा कुल आवश्यकता 8287 मीट्रिक टन की तुलना में बेहद कम मानी जा रही है।
किसानों के हाथ में कितना?
विभाग के अनुसार जिले में अब तक 32909 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण किया गया है। लेकिन इसमें से 12724 मीट्रिक टन पहले ही वितरित हो चुका है। नतीजा यह है कि वास्तविक उपलब्ध स्टॉक घटकर 20,185 मीट्रिक टन रह गया है। यानी आंकड़ों में भंडारण भले बड़ा दिखाई दे लेकिन किसानों के लिए उपलब्ध मात्रा जरूरत के मुकाबले काफी कम है।
लेकिन खेती सिर्फ यूरिया से नहीं चलती
जिले में सबसे ज्यादा उपलब्धता यूरिया की है। कुल 8807 मीट्रिक टन यूरिया स्टॉक में है। लेकिन कृषि विशेषज्ञ लगातार चेताते रहे हैं कि फसल उत्पादन केवल यूरिया पर निर्भर नहीं हो सकता। बुवाई के समय डीएपी और कॉम्प्लेक्स खाद की जरूरत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे में यूरिया का बड़ा स्टॉक भी डीएपी की कमी की भरपाई नहीं कर सकता।
राहत की उम्मीद ट्रकों और वेयरहाउस से
विभाग का कहना है कि कंपनी वेयरहाउस में अभी भी 1186 मीट्रिक टन यूरिया, 3,610 मीट्रिक टन एनपीके, 844 मीट्रिक टन एसएसपी और 29 मीट्रिक टन डीएपी मौजूद है। इसके अलावा ट्रांजिट में भी खाद की खेप बताई जा रही है। लेकिन किसानों के लिए सवाल वही है जो खाद ट्रकों और गोदामों में है, वह सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों तक कब पहुंचेगी?
निजी कारोबारियों के पास बड़ा स्टॉक
उपलब्ध 20,185 मीट्रिक टन उर्वरक में से 7,600 मीट्रिक टन निजी विक्रेताओं के पास है। समितियों के पास 3,071 मीट्रिक टन और एमपी एग्रो के पास सिर्फ 58 मीट्रिक टन स्टॉक बचा है। यह स्थिति बताती है कि किसानों की निर्भरता धीरे-धीरे सहकारी व्यवस्था से हटकर निजी बाजार की ओर बढ़ रही है।
असली चुनौती अब शुरू
हर साल की तरह इस बार भी प्रशासन पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा है। लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि खरीफ की असली मांग शुरू होने से पहले ही डीएपी का स्टॉक सीमित हो चुका है। यदि आपूर्ति की रफ्तार नहीं बढ़ी तो आने वाले हफ्तों में खाद केंद्रों पर भीड़, लंबी कतारें और वितरण को लेकर विवाद खड़े होना तय माना जा रहा है। बारिश आने वाली है, किसान खेत में उतरने को तैयार हैं, लेकिन उर्वरक व्यवस्था अभी भी इंतजार की मुद्रा में खड़ी दिखाई दे रही है।


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