सतना जिले में उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। लक्ष्य के मुकाबले केवल 45.28 प्रतिशत लोग साक्षर हुए, जिससे जिला प्रदेश के निचले पायदान पर पहुंच गया है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिनसे पढ़ना-लिखना नहीं आता है उन्हें यह सिखाने के लिए भले ही कार्यक्रम का नाम उल्लास रखा गया है लेकिन जमीनी हकीकत अनमन है। कहने का आशय यह है कि लक्ष्य के विरूद्ध 50 फीसदी से भी कम अनपढ़ों को साक्षर करने में सफल रहे। यानि इन लोगों के लिए आज भी काला अक्षर भैंस बराबर है। यह तब है जब आदिवासी बाहुल्य जिला आगे बढ़ गए लेकिन सतना जिला बॉटम के टॉप टेन में आकर उल्लास में है।
उल्लास-नवभारत साक्षरता में सतना जिला बॉटम के टॉप टेन में है। यहां लक्ष्य के विरुद्ध 45.28 प्रतिशत लोग ही साक्षर हो पाए हैं। यह मार्च 2023 से मार्च 2026 तक हुई परीक्षाओं में हुआ। इसके लिए 3 लाख 51 हजार 9 सौ 63 का लक्ष्य दिया गया था जिसमें से हर साल हुई दो परीक्षाओं से मात्र 1 लाख 59 हजार 3 सौ 52 ही साक्षर हो पाए। इस चक्कर में जिला प्रदेश के निचले पायदान में आठवें नंबर पर है।
खुश हैं कि राजधानी बॉटम में टॉप
सतना जिला इस बात से खुश है कि उससे नीचे राजधानी मुख्यालय है। उल्लास नवभारत साक्षरता की सूची में भोपाल जिला सबसे नीचे हैं। यहां लक्ष्य के विरूद्ध मात्र 13.9 प्रतिशत साक्षर हो पाए हैं। जिले की रैंक 52 वीं है यानि बॉटम सूची में भोपाल पहले और सतना आठवें स्थान पर है। इस हिसाब से सतना की मशीनरी खुश नजर आ रही है। हालांकि समीक्षा बैठक के दौरान यह मामला काफी गर्म रहा।
संभाग में रीवा ही ठीक-ठाक
संभाग के जिलों की बात करें तो इसमें रीवा ठीक-ठाक स्थान रखा। यहां लक्ष्य से 73.3 प्रतिशत साक्षर हुए। इसके अलावा सीधी 64.9 प्रतिशत और सिंगरौली 52.7 प्रतिशत लोग साक्षर हो पाए। रीवा जिला के लिए 3 लाख 48 हजार 2 सौ 15 लक्ष्य दिया गया था इसमें से 3 साल की परीक्षाओं में 2 लाख 55 हजार 1 सौ 88 ही उत्तीर्ण हो सके। इसी तरह सीधी जिला में 1 लाख 90 हजार 8 सौ 56 लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 23 हजार 8 सौ 1 और सिंगरौली जिला में 3 लाख 31 हजार 6 सौ 75 के लक्ष्य के विरुद्ध 1 लाख 74 हजार 9 सौ 4 ही उत्तीर्ण हो सके।
प्रदेश में 62.5 प्रतिशत ही उत्तीर्ण
यह स्थिति केवल सतना या विंध्य की नहीं है समूचे प्रदेश में ही डावांडोल है। उल्लास नवभारत साक्षरता में मध्यप्रदेश के साक्षर लोगों का प्रतिशत 62.5 रहा। प्रादेशिक सूची के अनुसार प्रदेश में 1 करोड़ 35 लाख 21 हजार 5 सौ 31 लक्ष्य रखा गया था। इसके विरूद्ध 84 लाख 46 हजार 4 सौ 98 ही साक्षर हो पाए। अब आगे के लिए 50 लाख 75 हजार 33 असाक्षर बचे हुए हैं जिनको लेकर मुख्य सचिव ने 29 अप्रैल की बैठक में बॉटम वाले जिलों के कलेक्टर को इसमें सुधार लाने की बात कही थी।
यहां मशीनरी में ही गड़बड़ी
साक्षरता की कमान को लेकर प्रदेश में गड़बड़झाला है। प्रशासकीय व्यवस्था और वित्तीय व्यवस्था के बीच ही गड़बड़ी चल रही है। असल में प्रौढ़ शिक्षा के लिए कई जिलों में प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी का पद सृजित है लेकिन इन पर नियमित पदस्थापना नहीं हो पाई। इसके अलावा इनका वित्तीय कामकाज डाइट प्राचार्य के पास है यानि दोनों के बीच समन्वय की कमी है जिसका सीधा असर व्यवस्था पर पड़ रहा है। यह स्थिति किसी एक जिला की नहीं समूचे मध्यप्रदेश में है। यह कहा जा सकता है कि प्रौढ़ शिक्षा की मशीनरी में गड़बड़ी चल रही है।
सीएस महोदय की समीक्षा के दौरान बात सामने आई थी। कलेक्टर साहब से चर्चा कर आगे की योजना तैयार की जाएगी।
रावेन्द्र कुमार त्रिपाठी, प्रभारी-जिला प्रौढ़ शिक्षाधिकारी


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