ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान सतना और मैहर में स्कूल बंद हैं, फिर भी नामांकन का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। विभागीय आंकड़ों ने उपलब्धि के साथ नामांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और वास्तविकता पर बहस छेड़ दी है।
सतना जिले के सात सांदीपनि विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र से कृषि संकाय शुरू होगा। छात्रों को आधुनिक कृषि शिक्षा मिलेगी, हालांकि नियमित शिक्षकों और व्यावहारिक संसाधनों की कमी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
सतना और मैहर में आरटीई के तहत सत्र 2026-27 की 297 सीटें अब भी खाली हैं। दो चरणों की ऑनलाइन लॉटरी के बाद भी अपेक्षित दाखिले नहीं हुए, जिससे योजना की प्रभावशीलता और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
सतना जिले में उल्लास नवभारत साक्षरता अभियान अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा। लक्ष्य के मुकाबले केवल 45.28 प्रतिशत लोग साक्षर हुए, जिससे जिला प्रदेश के निचले पायदान पर पहुंच गया है।
सतना जिले में कक्षा परिवर्तन के बीच 17 हजार से ज्यादा विद्यार्थी ड्रॉपआउट, सबसे खराब स्थिति सोहावल ब्लॉक की। बड़ी कक्षाओं में हालात चिंताजनक, शिक्षा विभाग सुधार के दावे कर रहा है।
आरटीई एडमिशन 2026-27 में आवेदन तेज लेकिन दस्तावेज सत्यापन धीमा, हजारों आवेदन अधर में। बिना वेरिफिकेशन फार्म निरस्त होंगे, शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को समय पर सत्यापन कराने की सख्त चेतावनी दी है।
सतना के शासकीय विद्यालय में परीक्षा फॉर्म भरने की गलती से कक्षा 10 के छात्र का भविष्य संकट में पड़ गया। परिजनों ने प्रशासन से विशेष अनुमति देकर परीक्षा में शामिल कराने की मांग की।
सतना और मैहर जिलों में शिक्षा विभाग की ई-हाजिरी व्यवस्था सात माह बाद भी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाई है। शिक्षक और प्राचार्य की उपस्थिति 80 फीसदी के आसपास ही सिमटी है, जबकि अतिथि शिक्षकों की हाजिरी बेहतर बनी हुई है।
सतना जिले में प्री बोर्ड और छमाही परीक्षाओं के नतीजों ने शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर उजागर कर दी है। 48 स्कूलों का परिणाम 40 फीसदी से कम रहने पर प्रशासन सतर्क हो गया है।
सतना और मैहर जिले में हमारे शिक्षक एप की ई-हाजिरी व्यवस्था तकनीकी खामियों से ठप रही। एरर 402, 502 और टाइम आउट की समस्या के कारण शिक्षक, अतिथि शिक्षक और प्राचार्य हाजिरी नहीं लगा सके। नेटवर्क तलाशते शिक्षक छतों और बाउंड्री तक चढ़े, लेकिन हजारों लोग उपस्थित होकर भी अनुपस्थित दर्ज हो गए।






















