सतना जिले में प्री बोर्ड और छमाही परीक्षाओं के नतीजों ने शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर उजागर कर दी है। 48 स्कूलों का परिणाम 40 फीसदी से कम रहने पर प्रशासन सतर्क हो गया है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मुख्य बोर्ड परीक्षाओं में अभी गिनती के दिन बाकी हैं ऐसे में शिक्षा विभाग छमाही और प्रीबोर्ड के परिणामों के आधार पर वार्षिक परीक्षा का परिणाम सुधारने पर मंथन कर रहा है। गुरूवार की शाम ढाई घंटा चले इस मंथन में कई अन्य बातें सामने आई। बैठक के दौरान प्री बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम 50 फीसदी से कम और छमाही में 48 स्कूलों का परिणाम 40 फीसदी से कम आया है। जिला शिक्षा अधिकारी गिरीश अग्निहोत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी के छमाही परिणामों में जिले के कक्षा 10 के 187 और कक्षा 12 के 97 स्कूलों में 75 प्रतिशत से अधिक कक्षा 10 में 24 और कक्षा 12 के 27 स्कूल, 40 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक कक्षा 10 के 125 और कक्षा 12 के 60 स्कूल तथा 40 प्रतिशत से कम के कक्षा 10 के 38 और कक्षा 12 के 10 स्कूल शामिल है।
एक शिक्षक वाली 97
एक शिक्षकीय शालाओं की संख्या 97 है जिनमें मझगवां में 17, उचेहरा में 27, नागौद में 31, रामपुर बघेलान और सोहावल में 11-11 शालायें शामिल है। सतना जिले में 1 से 5 छात्र संख्या वाली शालायें 69, कुल छात्र संख्या 6 से 10 वाली 128 और 11 से 20 छात्र संख्या वाली 342 स्कूल हंै। कलेक्टर ने कहा कि कम छात्र संख्या वाली शालाओं में दर्ज बच्चों का भौतिक सत्यापन करें। यदि किसी 1 से 5 छात्र संख्या वाली 69 शालाओं में दो या तीन शिक्षक पदस्थ है तो उन्हें संकुल अथवा अधिक संख्या वाली शालाओं में युक्ति-युक्तकरण करें। निपुण भारत की समीक्षा में बताया गया कि एफएलएन के तहत मेंटर विजिट का प्रतिशत दिसम्बर 25 तक 90.52 प्रतिशत रहा है। जनवरी माह में मेंटर विजिट 100 प्रतिशत रहा है।
रामपुर-उचेहरा में बनेगे लैब
हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में प्रयोगशाला के सुचारू संचालन पर विशेष ध्यान दें। जिन स्कूलों में प्रायोगिक सामग्री नहीं है उनका एस्टीमेट बनाकर जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत करें। ये बातें कलेक्टर ने कहीं। रामपुर और उचेहरा ब्लाक में डीएमएफ मद से लैब के नाम पर अतिरिक्त कक्ष निर्माण की बात कही गई।
परिणाम बेहतर तो मेडल
परीक्षाओं के परिणामों अपेक्षित सुधार आया तो प्राचार्यो को मेडल दिया जाएगा। रिव्यू बैठक में कलेक्टर ने कहा कि इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में शाला के रिजल्ट में अप्रत्याशित सुधार आने पर तीन केटेगरी में प्रत्येक विकासखंड से एक-एक प्राचार्य को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया जायेगा। कलेक्टर ने प्रत्येक विकासखंड में पिछली बोर्ड परीक्षाओं में सर्वाधिक और सबसे कम रिजल्ट वाली शालाओं, छमाही और प्री बोर्ड की परीक्षा में आये बदलाव की तुलनात्मक समीक्षा की।
85 फीसदी में अटकी ई-हाजिरी
जिले में ई-हाजिरी 85 फीसदी में अटकी हुई है। रिव्यू के दौरान स्कूल इंचार्ज 85.33 प्रतिशत, शिक्षक 85.68 प्रतिशत, गेस्ट फैकल्टी 93.61 प्रतिशत और व्होकेशन शिक्षक तथा अन्य स्टाफ की ई-अटेंडेंस 94.32 प्रतिशत दर्ज हो रही है। ई-अटेंडेंस से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। असरार स्कूल में बोर्ड परीक्षा का परिणाम 17 प्रतिशत रहा है जो छमाही और प्री बोर्ड परीक्षा में बढ़कर 48 प्रतिशत हो गया है।
शून्य शिक्षक की स्कूल जीरो
कम छात्र संख्या और शाला में पदस्थ शिक्षकों का युक्ति-युक्तिकरण कर शून्य शिक्षकीय शाला जीरो कर दी गई है। सतना जिले में अब एक भी शाला शिक्षक विहीन नहीं है। इसी प्रकार ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू होने से दूरस्थ स्कूलों की शैक्षिक व्यवस्था में सुधार आया है। हाईस्कूल असरार में पिछले बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट 17 प्रतिशत रहा है।


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