सतना जिले की पंचायतों में भ्रष्टाचार के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। तदुनहा पंचायत में फर्जी मजदूरी और जेसीबी भुगतान तो खरमसेड़ा पंचायत में लड्डू वितरण के नाम पर हजारों का घोटाला किया गया। ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन खामोश।

हाईलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले की ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की नई मिसालें सामने आ रही हैं। तदुनहा पंचायत से लेकर अमरपाटन जनपद की खरमसेड़ा पंचायत तक, एक के बाद एक घोटाले उजागर हो रहे हैं। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत से योजनाओं की राशि का बंदरबांट हो रहा है, जबकि प्रशासन मौन है।
तदुनहा पंचायत: पेवर्स ब्लॉक में धांधली, मजदूरी में हेराफेरी
तदुनहा पंचायत में 24 नग पेवर्स ब्लॉक के नाम पर 29 टाली डस्ट लगाकर बिल पास कर दिया गया। हर एक पेवर्स ब्लॉक के लिए 4000 रुपये की दर से राशि निकाली गई, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सारा काम बिना किसी मापदंड और निरीक्षण के किया गया। पंचायत के कार्यों को देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि किस हद तक भ्रष्टाचार किया गया है। इतना ही नहीं, गांव से बाहर के मजदूरों के नाम पर हजारों रुपये की मजदूरी दर्शाई गई। इन मजदूरों का न तो कोई स्थानीय रिकॉर्ड है और न ही किसी को उनका पता। गांव के ही कई मजदूरों का कहना है कि उन्हें काम नहीं दिया गया, लेकिन मजदूरी के पैसे किसी और के खाते में चले गए। बिल पास करने की जिम्मेदारी संकल्प राणा पर है, जिन पर पहले भी निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप लग चुके हैं।
फर्जी जेसीबी भुगतान का खेल
तदुनहा पंचायत में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। जिस व्यक्ति के पास जेसीबी मशीन ही नहीं है, उसके नाम पर हजारों रुपये का भुगतान कर दिया गया। जेसीबी के बिल पंचनामे और कार्य आदेश के बिना ही पास कर दिए गए। प्रशासनिक निगरानी के अभाव में भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।
खरमसेड़ा पंचायत: मीठे लड्डू के मीठे घोटाले
अमरपाटन जनपद की खरमसेड़ा पंचायत में ग्रामसभा की बैठक के नाम पर महज एक घंटे में 15 किलो लड्डू का 14,850 रुपये का बिल पास कर लिया गया। दिलचस्प बात यह है कि तीन अलग-अलग 5-5 हजार रुपये के बिल लगाए गए, जिनमें से सभी की तिथि एक ही है। ये लड्डू अमरपाटन के प्रसिद्ध बीकानेर मिष्ठान भंडार से मंगवाए गए बताए गए हैं। वार्ड पंचों ने इस घोटाले का विरोध करते हुए कहा है कि न तो किसी प्रकार की विशेष बैठक हुई, और न ही इस तरह की मिठाई बांटी गई। उनका कहना है कि यह सब वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत और संरक्षण में किया जा रहा है। पंचायत दर्पण पोर्टल पर अपलोड किए गए ये फर्जी बिल अब आमजन की नजर में आ गए हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रशासन मौन, ग्रामीणों में आक्रोश
इन घोटालों से जहां आम ग्रामीणों में आक्रोश है, वहीं जिला प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों में त्वरित जांच और कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है, लेकिन अब तक न तो किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई हुई है और न ही पंचायत सचिव या सरपंच से जवाब-तलबी हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिला कलेक्टर और जनपद सीईओ खुद मौके पर आकर जांच करें और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करें। अगर शीघ्र ही कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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