सतना जिले में गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर के 960 मामले सामने आए, केवल 615 नियंत्रित, अनियमित जीवनशैली जिम्मेदार, विशेषज्ञों ने नियमित जांच और संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक स्थिति सामने आई है। अव्यवस्थित खान-पान और अनियमित दिनचर्या के चलते प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार एक अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक, जिला अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर बढ़ने के 960 मामले सामने आए हैं। यह संख्या पिछले वर्ष 2024-25 के 287 मामलों की तुलना में स्पष्ट रूप से अधिक है, जो इस समस्या के तेजी से बढ़ने की ओर संकेत करती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन 960 मामलों में से केवल 615 गर्भवतियों का ही ब्लड प्रेशर नियंत्रित किया जा सका। शेष महिलाओं को प्रसव तक हाई बीपी की समस्या से जूझना पड़ा,जो मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह बढ़ता आंकड़ा एक चेतावनी है,जो समय रहते ठोस कदम उठाने की मांग कर रहा है,ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित किया जा सके। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस बढ़ती समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में यह स्थिति और गंभीर रूप ले सकती है।
नियमित जांच के बावजूद भी समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार,गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच के बावजूद कई महिलाओं के स्वास्थ्य पैरामीटर बॉर्डर लाइन पर बने रहते हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मामलों में पारिवारिक इतिहास (फैमिली हिस्ट्री) भी हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है,जबकि कई बार प्लेसेंटा में बदलाव के चलते भी यह समस्या उत्पन्न होती है। डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या,समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और मानसिक तनाव से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही, किसी भी प्रकार के लक्षण नजर आने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की गई है।
शहरी क्षेत्र में चौंकाने वाले आंकड़ें
गर्भवती महिलाओं में अगर ब्लड प्रेशर हाई के मामलों को देखा जाए तो सबसे अधिक केस उचेहरा ब्लॉक में सामने आ रहे हैं। यहां वर्ष 2025-26 में 344 गर्भवतियों में हाई बीपी के मामले रिपोर्ट हुए। इनमें से 293 का बीपी कंट्रोल हो पाया। इसके बाद मझगवां में 154 गर्भवतियों में हाई बीपी की समस्या देखने को मिली जिसमे से केवल 64 महिलाओं का ही बीपी मैनेज्ड हो पाया। सतना शहरी क्षेत्र में चौंकाने वाले आंकड़े देखने को मिले यहां 63 गर्भवतियों में से केवल 6 गर्भवतियों का बीपी कंट्रोल हो सका। इसके अलावा नागौद में 132 में 78, रामपुर बघेलान में 136 में 78 और कोठी में 131 में 96 मामले ही मैनेज्ड हो पाए। स्त्री रोग विशेषज्ञों की मानें तो गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर का हाई होना खतरनाक होता है। ऐसा होने से प्रसव के वक्त जच्चा-बच्चा दोनों की जान जोखिम में पड़ जाती है। जिला अस्पताल के गायनिक विभाग में आए दिन इस प्रकार के केस सामने भी आते हैं। अब तक कई गर्भवतियों ने हाई ब्लड प्रेशर के बाद जान भी गंवाई है।
रेगुलर चेकअप ही बचाव
डॉक्टर बताते हैं कि गर्भावस्था के दौरान रेगुलर चेकअप से हाई बीपी की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाएं न तो समय-समय पर रेगुलर चेकअप करातीं हैं और न ही एएनएम और स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला ध्यान देता। ग्रामीण क्षेत्रों में 40 फीसदी गर्भवतियां ऐसी रहती हैं, जिनके गर्भावस्था से प्रसव के बीच एक-दो या फिर एक भी चेकअप नहीं हो पाते। जब प्रसव का समय आता है तब जच्चा-बच्चा की जान जोखिम में पड़ जाती है।
अनियमित खान-पान और अव्यवस्थित जीवनशैली के कारण बीपी की समस्याएं देखने को मिल रही है। समय से हर माह चेकअप कराना जरूरी है, तभी जल्द निदान हो सकता है। प्रसव के समय हाई बीपी जोखिम भी हो सकता है।
डॉ. मंजू सिंह, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल


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