बच्चों के यौन शोषण मामले में फंसे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। जानें क्या है अजय पाल शर्मा से जुड़ा विवाद।
By: Ajay Tiwari
Feb 24, 20265:37 PM
प्रयागराज/वाराणसी। स्टार समाचार वेब
ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बच्चों के यौन शोषण के गंभीर आरोपों में घिरे शंकराचार्य ने गिरफ्तारी से बचने के लिए मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका दाखिल की है। यह कदम तब उठाया गया है जब प्रयागराज पुलिस की सक्रियता वाराणसी में बढ़ गई है और उनकी गिरफ्तारी की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
सोमवार को प्रयागराज पुलिस की एक विशेष टीम वाराणसी पहुंची, जहां उन्होंने स्थानीय पुलिस की मदद से शंकराचार्य और उनके करीबियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई। सूत्रों के अनुसार, पुलिस किसी भी समय आश्रम पहुंचकर पूछताछ या गिरफ्तारी कर सकती है।
इसी बीच, शंकराचार्य ने वाराणसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस प्रशासन पर तीखे हमले बोले। उन्होंने प्रयागराज के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर सीधा आरोप लगाते हुए इसे एक गहरी साजिश बताया।
"एक हिस्ट्रीशीटर (आशुतोष महाराज) के साथ पुलिस का इतना बड़ा अधिकारी जन्मदिन मना रहा है। यह सब योजनाबद्ध है ताकि मुझे 'गो-रक्षा अभियान' से पीछे हटने पर मजबूर किया जा सके, लेकिन मैं झुकूंगा नहीं।"
— शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य ने प्रमाण के तौर पर एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें अजय पाल शर्मा और शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज एक साथ केक काटते नजर आ रहे हैं।
18 जनवरी: माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
24 जनवरी: जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। इसमें माघ मेला और महाकुंभ के दौरान बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया।
8 फरवरी: पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने पर आशुतोष महाराज ने स्पेशल पॉक्सो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
21 फरवरी: कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। इसमें शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात लोगों को नामजद किया गया।
23 फरवरी: पुलिस की टीम वाराणसी पहुंची और जांच का दायरा बढ़ाया।
फिलहाल, पुलिस आशुतोष महाराज को साथ लेकर माघ मेला क्षेत्र के उस स्थान का मुआयना कर चुकी है जहां शंकराचार्य का शिविर लगा था। वहीं, शंकराचार्य का खेमा इसे पूरी तरह से 'पॉलिटिकल वेंडेटा' और गो-सेवा आंदोलन को दबाने की कोशिश बता रहा है। अब सबकी नजरें इलाहाबाद हाईकोर्ट पर टिकी हैं कि क्या उन्हें गिरफ्तारी से राहत मिलती है या नहीं।