सिंगरौली में शासकीय भूमि अतिक्रमण मामले में सिविल जेल भेजे जाने पर ग्रामीण ने एसडीएम न्यायालय में गंभीर आरोप लगाए। प्रशासन ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कार्रवाई को पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया।

हाईलाइट्स:
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में सिविल जेल भेजे जाने की कार्रवाई को लेकर ग्राम बरौंहा निवासी लाले प्रसाद शर्मा ने एसडीएम न्यायालय में गंभीर आरोप लगाए हैं। अधिवक्ता के माध्यम से प्रस्तुत अभ्यावेदन में दावा किया गया है कि पूरी कार्रवाई विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई और एसडीएम स्तर पर तानाशाही रवैया अपनाया गया। हालांकि इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अभ्यावेदन के अनुसार तहसीलदार द्वारा खसरा क्रमांक 498 की शासकीय भूमि पर 0.020 हेक्टेयर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए वर्ष 2024 में प्रकरण दर्ज किया गया था। आरोप है कि बिना विधिवत नोटिस तामील किए और बिना साक्ष्य एवं सुनवाई का अवसर दिए 27 अगस्त 2024 को बेदखली का आदेश पारित कर दिया गया। इसके बाद 27 मई 2026 को सिविल जेल भेजने का प्रस्ताव तैयार कर एसडीएम न्यायालय को भेज दिया गया। लाले प्रसाद शर्मा ने आरोप लगाया है कि उन्हें बेदखली वारंट की तामील भी नहीं कराई गई और सिविल जेल भेजने से पहले उनका पक्ष भी नहीं सुना गया। उनका कहना है कि 13 जुलाई की शाम आदेश पारित होने के बाद 14 जुलाई की सुबह बिना पूर्व सूचना उन्हें उठा लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसडीएम ने उनसे कहा कि "पहले घर गिराओ, उसका वीडियो बनाकर दिखाओ, फिर छोड़ देंगे। इस कथित बयान को लेकर उन्होंने न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई है। अभ्यावेदन में यह भी कहा गया है कि विवादित भूमि की मौके पर विधिवत पैमाइश नहीं कराई गई और केवल पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर अतिक्रमण मान लिया गया। साथ ही यह भी दावा किया गया कि संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में त्रुटियों के सुधार का प्रकरण पहले से ही न्यायालय में लंबित है।
इस संबंध में उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा भी रिकॉर्ड सुधार के मामले का प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए जाने का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि वर्ष 2024 में प्रारंभ हुआ प्रकरण जून 2025 में पंजीबद्ध किया गया और इसकी जानकारी वर्ष 2026 में दी गई। इसे आवेदक ने प्रशासनिक मनमानी बताते हुए कहा कि पूरी कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उनका यह भी कहना है कि बेदखली आदेश के विरुद्ध प्रथम अपील निरस्त होने के बाद उन्होंने अपर आयुक्त, रीवा संभाग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत कर दी है, जो विचाराधीन है। ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले सिविल जेल की कार्रवाई उचित नहीं है।
राजनीतिक संरक्षण का आरोप
अभ्यावेदन में राजनीतिक संरक्षण का भी आरोप लगाया गया है। लाले प्रसाद शर्मा का कहना है कि गांव के कुछ लोगों की रंजिश और राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने उनके विरुद्ध कार्रवाई की। उन्होंने एसडीएम द्वारा भेजे गए सिविल जेल प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की है।
लाले प्रसाद शर्मा के द्वारा अतिक्रमण किया गया है तहसीलदार के द्वारा बेदखल किया गया फिर भी इन्होने अतिक्रमण कर लिया। फिर से जेसीबी लगाकर हटाया गया। कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन किया। जिसके चलते जेल हुई है।
सुरेश जाधव, एसडीएम सिंगरौली


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