सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है जिसमें रेलवे को मृत कर्मचारी के पोते को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण मामले में सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें रेलवे अधिकारियों को एक मृत रेलवे कर्मचारी के पोते को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने भारत सरकार और रेलवे की उस विशेष याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। यह फैसला उन परिवारों के लिए राहत भरा है जो अनुकंपा नियुक्ति के लिए लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
यह पूरा कानूनी विवाद प्रतिवादी-जितेंद्र वर्मा से जुड़ा हुआ है। जितेंद्र वर्मा के दादा का निधन वर्ष 2002 में और पिता का निधन वर्ष 2006 में हो गया था। पिता और दादा के साए से महरूम होने के बाद उनकी परवरिश उनकी दादी, छमा बाई ने की।
छमा बाई वेस्ट सेंट्रल रेलवे के भोपाल डिवीजन में हेल्पर-II / खलसी के पद पर कार्यरत थीं। सेवा के दौरान ही 19 जून 2016 को उनका निधन हो गया। वर्ष 2007 में ही छमा बाई के सर्विस रिकॉर्ड में जितेंद्र वर्मा का नाम कानूनी उत्तराधिकारी और नॉमिनी के रूप में दर्ज कर लिया गया था। इसके बाद उन्होंने सिविल कोर्ट से कानूनी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (सक्सेशन सर्टिफिकेट) भी प्राप्त किया, लेकिन रेलवे अधिकारियों ने अनुकंपा नियुक्ति के उद्देश्य से इस प्रमाण पत्र को स्वीकार करने से मना कर दिया।
रेलवे अधिकारियों के सामने यह दावा किया गया कि जितेंद्र वर्मा छमा बाई का गोद लिया हुआ बेटा है। हालांकि, रेलवे ने गोद लेने (Adoption) की कानूनी वैधता पर सवाल खड़े किए और अंततः उनके दावे को खारिज कर दिया। रेलवे का मुख्य तर्क यह था कि उनके नियमों के तहत पोते को अनुकंपा नियुक्ति देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। रेलवे के इस रुख के खिलाफ मामला सेंट्रल प्रशासनिक ट्रिब्यूनल और फिर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंचा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले की गहराई से जांच करते हुए अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ी रेलवे पॉलिसी के क्लॉज III का बारीकी से अध्ययन किया।
क्लॉज III के प्रावधान: इस नियम के तहत मृत कर्मचारी के बेटे, बेटी, विधवा या विधुर को पात्र माना गया है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि तय शर्तों के अधीन अनुकंपा नियुक्ति "किसी करीबी रिश्तेदार या गोद लिए गए बेटे-बेटी को भी दी जा सकती है।"
अदालत की टिप्पणी: हाईकोर्ट ने माना कि ट्रिब्यूनल ने इस प्रावधान के तहत प्रतिवादी के दावे पर नए सिरे से विचार करने का सही निर्देश दिया था। सबसे अहम बात यह रही कि अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही प्रतिवादी को कानूनी रूप से गोद लिया हुआ बेटा न माना जाए, फिर भी अधिकारी मृत कर्मचारी के एकमात्र करीबी रिश्तेदार के रूप में उसकी स्थिति और मानवीय पहलू को नजरअंदाज नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट होकर केंद्र सरकार और रेलवे प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां शीर्ष अदालत ने भी रेलवे की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को पूरी तरह से बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है जिसमें रेलवे को मृत कर्मचारी के पोते को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने नवरात्रि, दीपावली और छठ पूजा के मद्देनजर राज्यों को निर्देश दिए हैं कि सड़क किनारे सामान बेचने वाले वेंडर्स और कुम्हारों को बेवजह न हटाया जाए। सुरक्षा कारणों से विस्थापन पर वैकल्पिक जगह देना अनिवार्य है।
चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जानिए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी और इस पूरे विवाद की पूरी जानकारी।
उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। जानिए जातीय समीकरण और पूरी लिस्ट।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पति या पत्नी द्वारा अपने अधिकारों के लिए कानूनी कार्यवाही दायर करना मानसिक क्रूरता के दायरे में नहीं आता, बशर्ते कि ऐसा कदम उठाने के पीछे उचित और वैध कारण मौजूद हों।
वैश्विक बाजार में खाद की आपूर्ति में आ रही रुकावटों और आसमान छूती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने देश के किसानों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस बढ़ी हुई कीमत का पूरा आर्थिक बोझ खुद वहन किया। सरकार की इसी नीति के कारण किसानों को आज भी यूरिया की बोरी लगभग 300 रुपए के आसपास ही मिल रही है।
संसद की नई संसदीय समितियों के अध्यक्षों की सूची जारी कर दी गई है। इसमें कई नए चेहरों को मौका मिला है, जबकि शशि थरूर, अनुराग ठाकुर और चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई दिग्गजों को फिर से जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ‘सत्याग्रह’ नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इसके जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे किसान, छात्र, और महिलाओं के आंदोलनों को एक नक्शे पर जोड़ा जाएगा और संसद से सड़क तक समर्थन मिलेगा।
आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में शनिवार तड़के एक भीषण औद्योगिक हादसा हो गया। श्री सिटी स्पेशल इकोनॉमिक जोन स्थित एक निजी फार्मास्युटिकल यूनिट में बॉयलर फटने से पांच कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में सीजेपी का भारी प्रदर्शन। शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और विशाल ददलानी ने किया समर्थन।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह