सतना के जिगनहट रपटे पर बढ़ते जल स्तर के बावजूद लोक निर्माण विभाग ने वैरीकेटिंग की बजाय झाड़ियां रखकर आवागमन रोकने की हास्यास्पद कोशिश की। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी कर विभाग विवादों में आ गया। कलेक्टर और एसपी ने जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण भी किया।
सतना में महज तीन इंच बारिश से ही घरों और दुकानों में पानी घुस गया। स्मार्ट सिटी की नाकामी और ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलता यह हाल।
सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने मानसून के मद्देनजर अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की पहचान, जल निकासी व्यवस्था, और स्वास्थ्य से जुड़े उपायों को प्राथमिकता देने की बात कही। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए निरीक्षण और समयबद्ध कार्यवाही पर ज़ोर दिया गया है।
सतना के नारायण तालाब की बाउंड्री वॉल और पानी निकासी पुलिया में दरारें सामने आई हैं। पिछले साल भारी जलभराव की चपेट में आई उतैली बस्ती एक बार फिर खतरे में है। 4 करोड़ की लागत से हो रहे निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी और तय समय सीमा के बाद भी अधूरा कार्य स्थानीय प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
















