मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिलने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। गुजरात सरकार की ओर से 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े कई मामलों में उन्होंने पैरवी की।
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने चीफ जस्टिस आफ इंडिया को कई पत्र लिखकर राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा को तुरंत पद से हटाने की मांग की है।
राम मंदिर दान घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी (SIT) को जांच जल्द पूरी कर तार्किक नतीजे पर पहुंचाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और दान प्रबंधन में सुधार के संकेत दिए हैं।
इंदौर में आयोजित वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस में CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय का अनुभव कचहरी पहुँचने के साथ शुरू होता है।
देश की न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारने और टेक्नोलॉजी को शामिल करने पर वर्ष 2011 से अब तक 9,800 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद दशकों से अदालतों में धूल फांक रहे मुकदमों के निपटारे पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिला है।
मध्यप्रदेश सरकार ने जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी को REAT का चेयरमैन नियुक्त किया है। जानिए क्या है REAT की भूमिका और मध्यप्रदेश रियल एस्टेट में इसके महत्व की पूरी जानकारी।
सीजेआई ने कहा- भारत में अदालतों को आम लोगों के लिए आसान, पारदर्शी और असरदार बनाने के लिए तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। भारत में अब सुविधाएं डिजिटल हो चुकी हैं। जैसे कि मामलों की आनलाइन फाइलिंग और डिजिटल केस मैनेजमेंट।
देशभर की अदालतों में बढ़ते बोझ को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब पीड़ितों को कोर्ट-कचेहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके साथ ही उन्हें तारीख पर तारीख से भी छुटकारा मिलेगा। वहीं जमानत से जुड़े केसों में आदेश आदर्श रूप से अगले दिन जारी किया जाए और उसी दिन जेल प्रशासन तक पहुंचाया जाए।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत केस में अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। दरअसल, मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने अब इसकी सीबीआई जांच कराने की सिफारिश कर दी है। सरकार के इस फैसले के बाद अब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी इस पूरे सुसाइड मिस्ट्री की गुत्थी सुलझाएगी।
मध्यप्रदेश में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पाक्सो) के केस के पीड़ित की आयु तय करने के लिए 10वीं कक्षा की मार्कशीट को ही अहम माना जाएगा। यह नहीं होने पर पहली कक्षा में प्रवेश के समय दर्ज आयु को आधार माना जाएगा।






















