राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत उच्च शिक्षा में भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश भोज मुक्त विवि में राज्य स्तरीय प्रारंभिक बैठक को आयोजित की गई। वहीं बैठक में निर्णय लिया गया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति गठित की जाएगी।
मध्यप्रदेश में मंत्री, पूर्व मंत्री से लेकर विधायक-सांसद और अन्य पार्टी पदाधिकारियों द्वारा अनुशासन, भाषा की गरिमा तोड़ने के लगातार सामने आ रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं के बिगड़े बोल और अधिकारियों को खुलेआम दी जा रही धमकियों ने पार्टी-संगठन की जमकर किरकिरी करा रहे हैं। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने करैरा के एसडीओपी (प्रशिक्षु आईपीएस) आयुष जाखड़ को खुलेआम धमकी दी।
सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने अपनी भाषा नीति में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव किया है। हाल ही में जारी एक नए सर्कुलर के मुताबिक, इसी साल 1 जुलाई 2026 से शैक्षणिक सत्र 2026-27 के कक्षा 9 के छात्रों के लिए अब तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है।
देशभर में एनसीईआरटी की किताब को लेकर मच बवाल के बीच अब सीबीएसई ने भी एक बड़ा ऐलान किया है। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन-2023) के तहत सीबीएसई अगले सत्र यानी कि 2027-28 से नया सीबीएसई थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी- 2026 लागू करने जा रही है।
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंचता दिख रहा है। इसी बीच राज्य के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम का उत्तर भारतीय प्रवासी श्रमिकों को लेकर दिया गया बयान भाषा विवाद और उत्तर-दक्षिण राजनीति को फिर से हवा दे रहा है।

















