पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद सत्ता से बेदखल टीएमसी के बुरे दिनों की शुरुआत हो गई है। पार्टी की भीतरी कलह खुलकर सामने आ गई है। टीएमसी सांसद काकोली घोष जो कभी ममता की बेहद करीबी थीं, उन्होंने बागी रुख अख्तियार कर लिया है।
राजनीति में कुछ भी हो सकता है... यह कहावत मध्यप्रदेश भाजपा की महिला मोर्चा की घोषित नई प्रदेश कार्यकारिणी ने सिद्ध कर दी। कभी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खेमे में गिनी जाने वाली मोना सुस्तानी को अब भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी दी है।
कर्नाटक कांग्रेस में कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। शिवकुमार समर्थकों ने एक बार फिर सीएम चेहरा बदलने के लिए मोर्चा खोल दिया है। कर्नाटक कांग्रेस के अंदर लीडरशिप की खींचतान नवंबर 2025 में शुरू हुई, जब सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल के आधे रास्ते पर पहुंच गई।















