सूने आंगनों में खिलखिलाहट की गूंज और तरसती बांहों को आखिरकार एक अधूरा-सा सुकून मिल गया। मध्य प्रदेश में ममता का दायरा और परिवारों का दिल इस कदर बढ़ा है कि बीते पांच वर्षों के सभी रिकॉर्ड पीछे छूट गए। लगातार दूसरे साल यह साबित हुआ है कि समाज की सोच में एक मानवीय बदलाव आ रहा है।
एक तरफ जहां भारतीय महिलाएं आज अंतरिक्ष से लेकर ओलंपिक, रक्षा बलों से लेकर कॉपोर्रेट बोर्डरूम और राजनीति तक हर क्षेत्र में देश का नाम रोशन कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ समाज के कुछ रूढ़िवादी वर्ग उन्हें सुरक्षा के नाम पर चार दीवारों में कैद रखने की वकालत कर रहे हैं।














