मध्यप्रदेश के पिपरिया में 13 वर्षीय सत्यम ठाकुर ने अद्भुत साहस दिखाते हुए तेंदुए से मुकाबला किया। घायल होने के बावजूद सत्यम ने तेंदुए की गर्दन पकड़कर उसे पीछे धकेल दिया और अपनी जान बचाई। Suggested URL (English)
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में एक नवजात को मृत बताकर डेथ सर्टिफिकेट देने के 4 घंटे बाद वह जीवित मिला। जानें क्या है 'Abortus' केस और वजन कम होने पर डॉक्टरों का क्या है तर्क।
मेक्सिको में एक भीषण सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई है। क्रिसमस से एक दिन पहले पूर्वी मेक्सिको में एक तेज रफ्तार बस पलट गई, जिसमें एक बच्चे समेत 10 लोगों की जान चली गई और 32 लोग घायल हैं। वेराक्रूज ने जानकारी देते हुए बताया कि यह हादसा क्रिसमस से पहले जोंटेकोमाटलान कस्बे में हुआ।
देश आज प्रदूषण के ऐसे भंवर में फंस चुका है, जहां सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। हवा में घुला जहर अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं रहा, यह हर उम्र के लोगों के स्वास्थ्य को चुपचाप निगल रहा है। सबसे अधिक खतरे में हैं वो मासूम, जिनका इस प्रदूषण में कोई दोष नहीं।
गुजरात में एक भयावह सड़क हादसा हो गया। बीमार नवजात को अरवल्ली से अहमदाबाद ला रही एक एंबुलेंस में भीषण आग लग गई। इस भयावह हादसे में नवजात समेत कुल चार जिंदा जल गए। दमकल ने आग बुझाई, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
इंदौर के सरवटे बस स्टैंड पर मंगलवार दोपहर एक बस में नवजात शिशु लावारिस मिला। सनावद जा रही बस के कंडक्टर ने छोटी ग्वालटोली पुलिस को सूचना दी। दंपति बच्चे को छोड़कर फरार हो गए। जानें पूरा मामला और पुलिस की कार्रवाई।
मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में ट्रक हादसे का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है कि अब विधायक गोलू शुक्ला की बस ने पति-पत्नी और बच्चे की जान ले ली। चालक तीनों को रौंदने के बाद बस छोड़कर फरार हो गया। हादसे में घायल एक मासूम की हालत गंभीर है। अरबिंदो अस्पताल में उपचार चल रहा है।
सतना जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड और पीकू वार्ड में हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं। 30 बेड पर 68 बच्चों का इलाज चल रहा है। ब्रोंकाइटिस, वायरल फीवर, निमोनिया और टायफाइड जैसी बीमारियों से पीड़ित बच्चों को मजबूरी में फर्श पर लिटाकर इलाज करना पड़ रहा है। परिजन बेड शेयर करने को तैयार नहीं हैं, जबकि डॉक्टरों का कहना है कि रिकवरी में 5–6 दिन लगने से वार्ड खाली ही नहीं हो पा रहा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा- मोटर दुर्घटना मुआवजे के केस में बच्चों को गैर-आय अर्जित नहीं माना जा सकता। मुआवजे की गणना कुशल श्रमिक के न्यूनतम वेतन के आधार पर होनी चाहिए। यह फैसला उन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है जो दुर्घटनाओं में घायल हो जाते हैं और स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाते हैं।






















